अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Godda : चार साल पहले जब विजेता की डोली महागामा के माल खदहारा गांव से अमरपुर के लिए उठी थी, तो पूरे परिवार ने बेटी के लिए खुशहाल जिंदगी के सपने संजोए थे। शादी नीतीश कुमार गुप्ता से हुई और धीरे-धीरे घर में दो नन्हीं किलकारियां भी गूंजने लगीं। बाहर से देखने पर सब कुछ एक भरे-पूरे और खुशहाल परिवार जैसा दिखता था, लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर धीरे-धीरे शक और कलह की ऐसी दीवारें खड़ी हो रही थीं, जिसका अंत इतना दर्दनाक होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। बुधवार की शाम अचानक आई एक मनहूस खबर ने मायके वालों की दुनिया उजाड़ दी।
फोन पर कहा ‘उसने जान दे दी’, ससुराल पहुंचे तो उड़ गए होश
बुधवार को जब विजेता के मायके में फोन की घंटी बजी, तो ससुराल पक्ष ने सीधे शब्दों में कह दिया कि विजेता ने आत्महत्या कर ली है। यह सुनते ही पैरों तले जमीन खिसक गई और परिजन बदहवास हालत में अमरपुर गांव पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचते ही कहानी पूरी तरह उलझती नजर आई। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने विजेता को देखा, तो उसके शरीर पर चोट और जख्म के गहरे निशान थे। मां का कलेजा यह देखकर फट पड़ा और उन्होंने सीधे तौर पर इसे खुदकुशी मानने से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि अगर उसने खुदकुशी की थी, तो शरीर पर इस तरह के निशान कैसे आए?
दूसरी लड़की से बातचीत की जिद ने ली जान?
मृतका की मां का सीधा आरोप है कि इस पूरे विवाद की जड़ में एक तीसरा इंसान था। उनका कहना है कि नीतीश का किसी दूसरी लड़की से लगातार संपर्क था और वह फोन पर घंटों बातें किया करता था। विजेता जब भी इसका विरोध करती, घर में भारी बवाल मच जाता था। बात सिर्फ कहासुनी तक नहीं रहती थी, बल्कि विजेता के साथ मारपीट भी की जाती थी। मां का साफ कहना है कि नीतीश ने किसी और के चक्कर में आकर अपनी ही पत्नी का गला घोंट दिया और फिर पूरे मामले को खुदकुशी का रंग देने की कोशिश की।
अस्पताल के गलियारे में बिलखते रहे अपने, न पति दिखा न बच्चे
सदर अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर का मंजर बेहद गमगीन था। जब परिजन विजेता को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने नब्ज टटोलते ही उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। मायके पक्ष का दर्द इस बात से भी बढ़ गया कि इस मुश्किल घड़ी में ससुराल का एक भी सदस्य अस्पताल के आसपास नजर नहीं आया। इतना ही नहीं, विजेता के दोनों मासूम बच्चों को भी कहीं छिपा दिया गया और ननिहाल वालों को उनसे मिलने तक नहीं दिया गया। परिजनों के मन में सवाल यही है कि अगर ससुराल पक्ष बेकसूर था, तो वे अस्पताल छोड़कर क्यों भागे?
पुलिस के हाथ में जांच की कमान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी राज
घटना की खबर मिलते ही नगर थाना पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और परिजनों के बयान दर्ज किए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पथरगामा थाना प्रभारी कृष्णा प्रसाद साह ने बताया कि परिजनों ने हत्या का गंभीर आरोप लगाया है, लेकिन यह मामला हत्या का है या आत्महत्या का, इसका असली खुलासा पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो पाएगा। फिलहाल पुलिस हर पहलू को खंगाल रही है और दोनों पक्षों से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
इसे भी पढ़ें : झारखंड के इन 6 जिलों में दिखेगा तूफान ‘अर्नब’ का असर, होगी आफत की बारिश



