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Ranchi : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हेमंत सरकार झारखंड के बालू घाटों को माफियाओं, दलालों और बिचौलियों के हवाले करने की योजना बना रही है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा 500 से अधिक बालू घाटों की नीलामी के लिए बनाई गई नियमावली की कड़ी आलोचना की। प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय युवकों और बेरोजगारों को रोजगार का नारा देकर केवल छलावा कर रही है। नियमावली ऐसी बनाई गई है कि गरीब, आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के लोग इसमें भाग नहीं ले सकेंगे, जबकि माफिया और दलालों के लिए यह रास्ता आसान बना दिया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान नियमावली के अनुसार बालू घाटों को जिला स्तर पर समूह में बांटा गया है। उदाहरण के तौर पर:
- गोड्डा जिला: 16 घाट ए समूह में
- जामताड़ा: 15 घाट ए, 5 घाट बी
- दुमका: 14 घाट ए, 12 घाट बी, 5 घाट सी
- सरायकेला: 4 घाट ए, 7 घाट बी
- पूर्वी सिंहभूम: 3 घाट ए, 2 घाट बी
- गिरिडीह: 3 घाट ए, 2 घाट बी, 3 घाट सी, 6 घाट डी, 2 घाट ई
उन्होंने कहा कि नीलामी में आवेदन के लिए 15 करोड़ रुपए सालाना टर्नओवर की शर्त और शराब ठेका जैसा नॉन रिफंडेबल शुल्क लगाना इसीलिए तय किया गया ताकि आम आदिवासी, गरीब और बेरोजगार युवक इसमें शामिल न हो सकें।
मरांडी ने आरोप लगाया कि वर्तमान नियमों के माध्यम से अवैध बालू उत्खनन को वैध बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार समूह के एक घाट को पर्यावरण अनुमति दिला देगी और फिर पूरे समूह के घाटों से बालू उठाने का मार्ग खुल जाएगा। उनका कहना था कि यह पूरा खेल माफियाओं के हवाले करने की साजिश है।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि बालू घाटों का अधिकार ग्राम सभा को दिया जाए और अवैध नीलामी के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। श्री मरांडी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार नहीं सुधरी तो अवयवों और सचिवों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जैसा कि पहले भी वरीय आईएएस अधिकारी जेल गए थे। इस दौरान प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा भी मौजूद थे।
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