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Hazaribagh : 26 अप्रैल की रात करीब 9 बजे का वक्त था। हजारीबाग के केरेडारी इलाके में कोयला स्टेशन के पास सन्नाटा पसरा हुआ था। उसी सन्नाटे को गोलियों की आवाज ने तोड़ दिया। बाइक पर सवार एक दंपती पर हमला हुआ। लोग जब तक कुछ समझ पाते, मंजू देवी खून से लथपथ जमीन पर गिर चुकी थी उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जिंदगी की डोर टूट चुकी थी। वहीं उनके पति विकास प्रजापति घायल होने की बात कह रहे थे। उस वक्त तक किसी को अंदाजा नहीं था कि कहानी इतनी दर्दनाक मोड़ लेगी।
भरोसे का कत्ल
मंजू देवी के लिए यह हमला सिर्फ एक अपराध नहीं था, बल्कि भरोसे का कत्ल साबित हुआ। जिस इंसान के साथ उन्होंने जिंदगी बिताने के सपने देखे, उसी ने उनकी जिंदगी खत्म करने की साजिश रच दी। पुलिस जांच में सामने आया कि पति विकास प्रजापति ने ही अपने पिता और साथियों के साथ मिलकर यह पूरी योजना बनाई थी। एक ऐसी योजना, जिसमें पत्नी को हमेशा के लिए रास्ते से हटाना था।
घर की दीवारों के भीतर का तनाव
बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता था, लेकिन घर के अंदर हालात अलग थे। पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद और तनाव बना रहता था। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते थे, जो धीरे-धीरे गहरे विवाद में बदल गए। इसी तनाव ने विकास के मन में खतरनाक सोच पैदा की। उसने सोचा कि अगर मंजू नहीं रहेंगी, तो उसकी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।
साजिश जो लूटपाट की तरह दिखी
हजारीबाग एसपी अमन कुमार ने खुलासा किया कि पूरी योजना बहुत सोच-समझकर बनाई गई थी। घटना को लूटपाट का रूप देने की कोशिश की गई, ताकि किसी को शक न हो। सुनसान इलाके में मंजू को गोली मार दी गई और खुद विकास ने भी घायल होने का नाटक किया। लेकिन सच ज्यादा दिन छिप नहीं सका। पुलिस की जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने धीरे-धीरे इस झूठ की परतें खोल दीं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की राह
पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए विकास प्रजापति, नरेश प्रजापति और लालेश्वर गांझू को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। इस केस में एसपी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी कुछ और अहम बातें सामने आ सकती हैं।
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