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Ranchi : रांची के दीपाटोली कैंट में शनिवार का दिन खास था। केरकेट्टा सभागार में बैठे सैनिक परिवारों की आंखों में उम्मीद की चमक थी। मंच पर दीप प्रज्वलित करते हुए झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने ऐलान किया… “यह विधिक सेवा क्लिनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्ररक्षकों के लिए हमारी प्रतिबद्धता है।” यह क्षण सिर्फ एक योजना का शुभारंभ नहीं था, बल्कि उन हजारों सैनिक परिवारों के लिए भरोसे का संदेश था, जिन्होंने देश की रक्षा में अपना सब कुछ दांव पर लगाया।
सैनिकों के लिए न्याय की नई राह
नालसा वीर परिवार सहायता योजना 2025 के अंतर्गत अब झारखंड के हर जिले में विधिक सेवा क्लिनिक खोले जायेंगे। यहां सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके आश्रित परिवारजन मुफ्त कानूनी सहायता पा सकेंगे। ज़मीन-जायदाद का विवाद हो या पेंशन-भत्ता, या फिर किसी भी तरह का कानूनी पेंच… अब उन्हें न्याय की तलाश में दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।
झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना ने कहा… “हमारी कोशिश है कि यह सेवा राज्य के सुदूर इलाकों तक पहुंचे और हर परिवार अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो।”
90 दिन का अभियान, अनगिनत उम्मीदें
कार्यक्रम में 90 दिवसीय वीर परिवार सहायता अभियान भी शुरू किया गया। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक सैनिक परिवारों को चिन्हित कर उन्हें त्वरित राहत और कानूनी मदद उपलब्ध कराना है।
मेजर जनरल सज्जन सिंह मान ने इसे सैनिकों और उनके परिजनों के लिए ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा… “जो लोग देश की हिफाज़त में दिन-रात लगे रहते हैं, उनके परिवारों को न्याय और सम्मान मिलना ही चाहिए।”
राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐतिहासिक निपटारा
इसी क्रम में राज्यभर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसमें 288 पीठों का गठन किया गया और 19,01,846 वादपूर्व व 1,60,032 लंबित मामलों का निपटारा हुआ। इस दौरान कुल ₹9,24,93,44,880 के विवादों का समझौता संपन्न हुआ।
कानून से ज्यादा एक सम्मान
मुख्य न्यायाधीश चौहान ने जो बात कही, वही इस योजना का सार है…“यह हमारे वीरों को श्रद्धांजलि है।” असल में यह योजना सिर्फ कानूनी मदद नहीं, बल्कि सैनिकों के बलिदान के प्रति समाज का सम्मान है। अब जब झारखंड के किसी सैनिक का परिवार किसी कानूनी उलझन में फंसेगा, तो उन्हें न अदालतों के चक्कर काटने होंगे और न ही वकीलों की फीस की चिंता। उनके लिए न्याय का दरवाज़ा पहले से कहीं ज्यादा आसान और खुला रहेगा।
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