अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna (Pawan Thakur) : मैदान में पसीना बहाते वक्त खिलाड़ी बस एक ही सपना देखता है… देश के लिए मेडल जीतना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना। लेकिन अक्सर मेडल जीतने के बाद भी कई खिलाड़ी संसाधनों की कमी और अनिश्चित भविष्य की लड़ाई में उलझकर रह जाते हैं। बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना इसी तस्वीर को बदलने का काम कर रही है। राज्य के 161 होनहार खिलाड़ियों के सपनों को उस वक्त नई उड़ान मिली, जब उन्हें उनके शानदार प्रदर्शन के एवज में सीधी सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र दिया गया।
वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर परचम लहराने वाले इन खिलाड़ियों को प्रशासनिक और पुलिस महकमे में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह सिर्फ एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि उन अनगिनत रातों की मेहनत का सम्मान है जो इन खिलाड़ियों ने मैदान पर बिताई हैं।
क्रिकेट के स्टार्स अब मैदान के साथ-साथ संभालेंगे कानून व्यवस्था
इस पूरी योजना में सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय क्रिकेट टीम के दो चमकते सितारों आकाश दीप और मुकेश कुमार की हो रही है। अपनी धारदार गेंदबाजी से देश-विदेश में बिहार का नाम रोशन करने वाले इन दोनों तेज गेंदबाजों को सरकार ने DSP के पद पर नियुक्त किया है। अब यह खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर विपक्षी बल्लेबाजों की गिल्लियां नहीं उखाड़ेंगे, बल्कि पुलिस अफसर के रूप में समाज में कानून और सुरक्षा का जिम्मा भी संभालेंगे। उनके इस मुकाम तक पहुंचने से राज्य के उन हजारों बच्चों को नई उम्मीद मिली है जो गांव-देहात के छोटे-छोटे मैदानों में क्रिकेट का सपना संजो रहे हैं।
सिर्फ पद नहीं, मिला समाज में ऊंचा दर्जा
योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें खिलाड़ियों को केवल औपचारिक पद नहीं दिए गए हैं, बल्कि उनकी योग्यता और मेडल के आधार पर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। चयनित 161 खिलाड़ियों में से कई को DSP बनाया गया है, तो कई सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा कई खिलाड़ियों को पंचायती राज पदाधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदों की कमान सौंपी गई है। इस पहल से खिलाड़ियों को आर्थिक स्थिरता तो मिली ही है, साथ ही समाज में एक नया मान और सम्मान भी मिला है।
मैदान से लेकर कोचिंग तक, हर स्तर पर बदलाव की बयार
नौकरी देने के साथ-साथ बिहार सरकार राज्य में एक बेहतर खेल माहौल तैयार करने में भी जुटी है। अक्सर देखा जाता है कि सही ट्रेनिंग और उपकरणों के अभाव में प्रतिभाएं दम तोड़ देती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए अब खिलाड़ियों को आधुनिक खेल मैदान, रहने के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल, अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग और बेहतर खेल उपकरण मुहैया कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, जब भी कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने जाता है, तो उसके आर्थिक खर्च की जिम्मेदारी भी सरकार उठा रही है।
मंत्री श्रेयसी सिंह बोलीं- एक नए बिहार की दिशा में बड़ा कदम
बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का मानना है कि राज्य का कोई भी खिलाड़ी सिर्फ पैसों या संसाधनों की तंगी की वजह से पीछे न रह जाए। ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि यह बिहार को देश का नया स्पोर्ट्स हब बनाने की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है। जब किसी राज्य के युवा यह देखते हैं कि उनके पसीने की हर बूंद की कद्र हो रही है, तो खेल सिर्फ शौक नहीं रहता, बल्कि एक सुरक्षित और सम्मानजनक करियर बन जाता है।
इसे भी पढ़ें : इमरजेंसी से लेकर मुफ्त डायलिसिस तक… सीएम सम्राट ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को दी नयी उड़ान

