अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : सुबह की हल्की धूप, मैदान में बिछी कुर्सियां, और चेहरे पर उम्मीद लिए बैठे ग्रामीण-इटकी के शियार टोली स्टेडियम और बेड़ो के बिशु भगत महिला कॉलेज परिसर में कुछ अलग ही माहौल था। यह सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि गांव की आवाज को मजबूती देने की एक कोशिश थी। कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘ब्लॉक संवाद कार्यक्रम’ में पहुंचे लोग केवल भाषण सुनने नहीं आए थे, बल्कि अपने हक, रोजगार और पहचान से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने आए थे।कांग्रेस के इस ब्लॉक संवाद कार्यक्रम में जब मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मंच पर पहुंचीं, तो माहौल अचानक जीवंत हो उठा। लोगों की निगाहें मंच पर थीं और उम्मीदें उनके शब्दों में।
राज्य की कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री के रूप में शिल्पी नेहा तिर्की ने इस कार्यक्रम को सिर्फ एक राजनीतिक आयोजन नहीं बनने दिया, बल्कि इसे जनता से सीधे संवाद का मंच बना दिया।
“नीतियां तभी सफल होती हैं, जब जनता जागरूक हो”
अपने संबोधन में मंत्री तिर्की ने साफ कहा कि मनरेगा, PESA कानून और SIR जैसे मुद्दे सिर्फ सरकारी योजनाएं नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा, “अगर लोग अपने अधिकार नहीं जानेंगे, तो कोई भी व्यवस्था उनके लिए काम नहीं कर पाएगी। हमारा काम है आपको जागरूक करना, ताकि आप खुद अपने फैसले ले सकें।” उनकी बातों में आदेश नहीं, बल्कि साझेदारी का भाव झलक रहा था।
ग्रामीणों से सीधा जुड़ाव
कार्यक्रम के दौरान मंत्री तिर्की मंच तक सीमित नहीं रहीं। वे कई बार नीचे उतरकर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों से बात करती नजर आईं। किसी ने मनरेगा की मजदूरी की समस्या बताई, तो किसी ने राशन और पंचायत से जुड़ी परेशानियां। मंत्री ने सबकी बात ध्यान से सुनी और अधिकारियों को मौके पर ही दिशा-निर्देश दिए। बेड़ो की एक महिला ने कहा, “पहली बार लगा कि कोई मंत्री हमारी बात सच में सुन रहा है।”
BLA को दिया जिम्मेदारी का संदेश
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने ब्लॉक लेवल अधिकारियों से कहा कि वे पार्टी के नहीं, जनता के सिपाही बनें। उन्होंने कहा, “आप गांव-गांव जाकर लोगों को अधिकारों की जानकारी दें। सरकार की योजनाओं के फायदे और खतरे दोनों बताएं। तभी भरोसा बनेगा।” उनका यह संदेश कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरता नजर आया।
PESA और मनरेगा पर विशेष जोर
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने विशेष रूप से PESA कानून को आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को मजबूत किए बिना विकास अधूरा है। मनरेगा को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे गरीब और मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
संवेदनशील नेतृत्व की झलक
कार्यक्रम के अंत में मंत्री तिर्की ने कहा, “राजनीति का मतलब सत्ता नहीं, सेवा है। जब तक गांव मजबूत नहीं होंगे, राज्य आगे नहीं बढ़ेगा।” उनके इन शब्दों ने यह साफ कर दिया कि वे खुद को सिर्फ मंत्री नहीं, बल्कि जनता का प्रतिनिधि मानती हैं।
इसे भी पढ़ें : कानून के रखवाले कटघरे में, सौंदा डी में उबाल पर लोगों का गुस्सा



