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New Delhi : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि अब देश में “राज” शब्द वाले सरकारी भवनों के नाम बदले जाएं। इस निर्देश के बाद कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय ने पिछले साल आयोजित राज्यपाल सम्मेलन में हुई चर्चा का हवाला देते हुए कहा है कि “राजभवन” जैसा नाम औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक रहा है। इसीलिए अब राज्यपालों और उप राज्यपालों के भवनों का नाम “लोकभवन” या “लोक निवास” रखा जाना चाहिए।
केंद्रीय कार्यालयों के नाम भी बदले गये
इस बदलाव का असर सिर्फ राज्य स्तर तक नहीं रहा। केंद्र सरकार ने अपने केंद्रीय कार्यालयों के नाम भी बदल दिये हैं:
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब “सेवा तीर्थ” कहलायेगा।
- केंद्रीय सचिवालय का नाम “कर्तव्य भवन” रखा गया है।
- पहले ही दिल्ली में “राजपथ” का नाम बदलकर “कर्तव्य पथ” कर दिया गया था।
- साथ ही प्रधानमंत्री आवास अब “लोक कल्याण मार्ग” कहलाता है।
इन बदलावों के पीछे मकसद था सरकारी संस्थानों और भवनों को उन लोगों की सेवा, दायित्व और लोक भलाई से जोड़ना।
अब कई राज्यों ने बदल दिया राजभवन का नाम
केंद्र के निर्देश के बाद कई राज्य अपना राजभवन बदल चुके हैं। इनमें शामिल हैं:
- पश्चिम बंगाल
- तमिलनाडु
- केरल
- असम
- उत्तराखंड
- ओडिशा
- गुजरात
- त्रिपुरा
साथ ही केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में राज निवास का नाम बदलकर “लोक निवास” कर दिया गया है। अब ताज़ा खबर है कि राजस्थान ने भी अपने राजभवन का नाम बदलने का ऐलान कर दिया है।
बदलाव की वजह और सरकार की सोच
सरकार का कहना है कि “राज” शब्द औपनिवेशिक युग का प्रतीक रहा है। वह सोच अब बदल चुकी है। नए नामों के माध्यम से यह संदेश देना है कि प्रशासन जनता के लिए है, राजसत्ता के लिए नहीं। “लोकभवन” या “कर्तव्य भवन” जैसे नामों का उद्देश्य सरकारी भवनों और संस्थानों को उनकी सेवा-संस्था की भावना से जोड़ना है।
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