अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : बिहार सरकार ने भिक्षावृत्ति रोकने और भिक्षुकों के पुनर्वास के लिए नई योजना बनाई है। अगले साल तक पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, अररिया, किशनगंज, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, मधेपुरा, औरंगाबाद, कटिहार, अरवल और रोहतास में नए भिक्षुक पुनर्वास गृह खोले जाएंगे।
वर्तमान में पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण में 19 पुनर्वास गृह काम कर रहे हैं। इन गृहों में भिक्षुकों को भोजन, आवास, वस्त्र, चिकित्सा, परामर्श, मनोरंजन और योगा जैसी सुविधाएं मुफ्त दी जा रही हैं। साथ ही उनके बिछड़े परिवार से मिलने और जोड़ने की भी व्यवस्था की गई है।
योजना के तहत भिक्षुकों को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रुपए तक की मदद, आधार और पैन कार्ड बनवाने, बैंक खाता खोलने तथा शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े अन्य लाभ भी दिए जाते हैं। अब तक 544 भिक्षुकों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। वृद्ध, विधवा या दिव्यांग भिक्षुकों को पेंशन भी मिलती है।
राज्य में 6 सक्षम उत्पादक समूह भी काम कर रहे हैं, जहां भिक्षुकों को स्किल डेवलपमेंट कोर्स कराया जाता है। ये समूह अगरबत्ती, दीया-बत्ती, नारियल झाड़ू, चप्पल और जूट से बने उत्पाद बनाकर बेचते हैं और आय निर्माताओं में बांटी जाती है।
योजना का लाभ सिर्फ बिहार के मूल निवासी भिक्षुक उठा सकते हैं। इसके लिए आयु सीमा नहीं है, लेकिन बाल भिक्षुक और वृद्धों के लिए विशेष प्रावधान हैं। पात्रता के लिए आर्थिक स्थिति प्रमाण पत्र और स्वास्थ्य संबंधी डॉक्टर का प्रमाण पत्र आवश्यक है। आवेदन जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग या जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (सक्षम कार्यालय) में जमा किया जा सकता है।



