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News Samvad : नोएडा में मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुआ प्रदर्शन अचानक हिंसक नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे पूरी तैयारी और साजिश थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हिंसा का मुख्य सूत्रधार जमशेदपुर एनआईटी से बीटेक कर चुका आदित्य आनंद है, जो मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला बताया जा रहा है। फिलहाल आदित्य फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। नोएडा के फेज-2 स्थित होजियरी कॉम्प्लेक्स में सोमवार को मजदूरों का प्रदर्शन उग्र हो गया था। इस दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई थी।
हिंसा के तीन मुख्य आरोपी, दो पकड़े गए
पुलिस ने इस मामले में हिंसा भड़काने वाले तीन मुख्य आरोपियों की पहचान की है। इनमें आदित्य आनंद के अलावा बिहार के रहने वाले ऑटो चालक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान का नाम शामिल है। पुलिस के मुताबिक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान को 11 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं, आदित्य आनंद अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।
पहले से थी तैयारी, अचानक नहीं भड़की भीड़
पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि मजदूरों का यह आंदोलन किसी एक दिन में नहीं बना था। आरोपियों ने पहले से इलाके में पहुंचकर लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया था। जानकारी के मुताबिक तीनों आरोपी 31 मार्च और 1 अप्रैल को ही नोएडा पहुंच गए थे। इसके बाद 9 और 10 अप्रैल को कई जगहों पर क्यूआर कोड स्कैन करवाकर व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए। मजदूरों को उन ग्रुपों में जोड़ा गया और वहीं से भीड़ को लगातार उकसाया गया।
व्हाट्सएप ग्रुप से फैलाया गया माहौल
पुलिस का कहना है कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए मजदूरों में गुस्सा बढ़ाने वाली बातें फैलाई गईं। धीरे-धीरे लोगों को प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया और फिर एक तय रणनीति के तहत हिंसा को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इन आरोपियों की मौजूदगी पहले दिल्ली में हुए सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों के दौरान भी देखी गई थी।
पुलिस का दावा : आदित्य 2020 से कर रहा है उकसाने का काम
पुलिस के मुताबिक आदित्य आनंद साल 2020 से देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे आंदोलनों को भड़काने का काम कर रहा है। पुलिस को शक है कि वह लंबे समय से मजदूरों के बीच नेटवर्क बनाकर उन्हें प्रदर्शन के लिए तैयार करता रहा है।
पाकिस्तान से चल रहे दो एक्स अकाउंट की भूमिका भी सामने आई
इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस लक्ष्मी सिंह के अनुसार हिंसा के दौरान दो एक्स अकाउंट लगातार फर्जी खबरें और मौत की झूठी जानकारी फैला रहे थे। इन अकाउंट्स के नाम अनुषी तिवारी और मीर इलियास बताए गए हैं। साइबर जांच में सामने आया कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे। पुलिस के अनुसार इनका मकसद भारत के औद्योगिक इलाकों में अशांति फैलाना और माहौल बिगाड़ना था।
पुलिस की दबिश जारी, आदित्य की तलाश तेज
फिलहाल पुलिस फरार आदित्य आनंद की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में कई और लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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