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New Delhi : आम लोगों की रसोई पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। अब राजधानी में यह सिलेंडर 853 रुपये की जगह 913 रुपये में मिलेगा। नई कीमतें आज से लागू कर दी गई हैं। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है, क्योंकि घरेलू बजट में रसोई गैस का बड़ा हिस्सा होता है।
एक मार्च को बढ़े थे कमर्शियल सिलेंडर के दाम
घरेलू सिलेंडर से पहले तेल कंपनियों ने एक मार्च को वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी इजाफा किया था। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 28 रुपये बढ़ाए गए थे, जबकि अन्य महानगरों में करीब 31 रुपये तक कीमत बढ़ी थी। अब दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 1768.50 रुपये हो गई है। इससे पहले एक फरवरी को भी इसमें 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह देखा जाए तो सिर्फ एक महीने के अंदर कमर्शियल सिलेंडर 81 रुपये तक महंगा हो चुका है।
गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार का कदम
गैस की बढ़ती मांग और वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार ने भी कदम उठाया है। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। दरअसल पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई में संभावित बाधाओं की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार चाहती है कि देश में रसोई गैस की कमी न हो और लोगों को आसानी से एलपीजी मिलती रहे।
रिफाइनरियों को दिए गए खास निर्देश
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च को जारी आदेश में सभी सार्वजनिक और निजी रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि उत्पादन के दौरान निकलने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का अधिकतम उपयोग एलपीजी बनाने में किया जाए। असल में एलपीजी इन्हीं दोनों गैसों के मिश्रण से तैयार होती है और देश में इसका सबसे ज्यादा उपयोग घरेलू रसोई गैस के रूप में किया जाता है।
सिर्फ तीन सरकारी कंपनियों को मिलेगी सप्लाई
सरकार ने आदेश में यह भी साफ किया है कि रिफाइनरियां जो एलपीजी बनाएंगी, उसे केवल तीन सरकारी तेल कंपनियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम शामिल हैं। साथ ही रिफाइनरियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में न किया जाए, बल्कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी उत्पादन पर ध्यान दिया जाए।
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