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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह की चाय पीकर जब 50 साल का सेराजुल शेख अपने घर से निकला था, तो उसने अपनी पत्नी और पांच बच्चों से कहा था कि शाम को हिरणपुर हाट से लौटकर आराम से बैठेंगे। बच्चों को उम्मीद थी कि अब्बू हाट से लौटते हुए कुछ लेकर आएंगे। लेकिन किसी को क्या पता था कि सेराजुल की वो बातें आखिरी थीं और अब वो कभी मुस्कुराते हुए उस घर के दरवाजे से अंदर नहीं आएगा। पाकुड़ जिले के हिरणपुर थाना क्षेत्र के तारापुर–सिउलीडांगा मार्ग पर सुराईडीह क्रशर के पास एक अज्ञात भारी वाहन ने सेराजुल को इस बेरहमी से कुचला कि मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।
रोजी-रोटी की खातिर 13 भैंसों को लेकर निकला था सेराजुल
पृथ्वीनगर गांव का रहने वाला सेराजुल शेख बेहद सीधा और मेहनती इंसान था। अपने पांच बच्चों का पेट पालने के लिए वह दिन-रात मजदूरी करता था। घटना वाले दिन भी वह कुछ स्थानीय व्यापारियों की 13 भैंसों को पैदल हांकते हुए हिरणपुर के साप्ताहिक हाट ले जा रहा था। इस काम के बदले उसे चंद रुपये मिलने वाले थे, जिससे उसके घर का राशन आता। रास्ते में उसके कुछ और साथी भी थे। सब हंसते-बोलते जा रहे थे कि अचानक सुराईडीह क्रशर के पास सेराजुल को शौच लगी। उसने साथियों से कहा— “तुम लोग भैंसों को लेकर आगे बढ़ो, मैं अभी आता हूँ।”
वो चंद मिनट का फासला और हमेशा के लिए बिछड़ गया सेराजुल
सेराजुल सड़क किनारे रुका और उसके साथी आगे निकल गए। यही चंद मिनट का फासला सेराजुल के लिए काल बन गया। काफी देर होने के बाद भी जब सेराजुल हाट नहीं पहुंचा, तो उसके साथियों का माथा ठनका। उन्हें लगा कि शायद वो पीछे छूट गया है। साथी उसे ढूंढते हुए वापस उसी रास्ते पर आए, चिल्लाकर उसका नाम पुकारा, लेकिन चारों तरफ सन्नाटा था। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस दोस्त को वो ढूंढ रहे हैं, वह कुछ ही दूरी पर दम तोड़ चुका है।
सड़क किनारे बिखरी पड़ी थीं उम्मीदें
तभी क्रशर के पास से गुजर रहे कुछ ग्रामीणों ने सड़क के किनारे एक क्षत-विक्षत शव देखा। किसी भारी गाड़ी ने उसे इतनी बुरी तरह रौंदा था कि पहचानना मुश्किल था। पुलिस को खबर दी गई। जब पुलिस ने आकर तफ्तीश की और साथियों ने पास जाकर देखा, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कोई और नहीं, बल्कि उनका साथी सेराजुल ही था। उसकी मौत हो चुकी थी और उसे कुचलने वाला वाहन हवा की रफ्तार से फरार हो चुका था।
अब उन पांच बच्चों का क्या होगा?
इस हादसे ने एक झटके में एक हंसते-खेलते परिवार की रीढ़ तोड़ दी है। सेराजुल के पीछे उसकी पत्नी और पांच मासूम बच्चे हैं, जिन्हें अभी यह भी नहीं मालूम कि ‘अनाथ’ होने का मतलब क्या होता है। घर में सेराजुल ही अकेला कमाने वाला था। जैसे ही उसका शव गांव पहुंचा, चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। पत्नी कभी बेहोश हो रही है तो कभी बच्चों को सीने से लगाकर रो रही है। गांव के लोग भी इस मंजर को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उस अज्ञात कातिल गाड़ी की तलाश में जुट गई है।
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