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Palamu : दिसंबर 2025 में जब सोनभद्र के औडिमोड से वैष्णवी की डोली मेदिनीनगर के रेडमा चौक के लिए उठी थी, तो मां-बाप ने आंखों में ढेरों सपने सजाए थे। सोचा था बेटी अपने नए संसार में खुशहाल रहेगी। शादी को अभी दस महीने ही गुजरे थे, हाथों की मेहंदी का रंग शायद पूरी तरह फीका भी नहीं पड़ा था कि मंगलवार की देर रात एक ऐसी खबर आई जिसने उस भरे-पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। जिस बेटी से रात नौ बजे मां ने हंसते-मुस्कुराते फोन पर बात की थी, रात ग्यारह बजे उसी वैष्णवी की देह अपने ही कमरे में फंदे से झूलती मिली। अब मायके की चौखट पर चीखें हैं, सिसकियां हैं और पीछे छूटे अनगिनत अनुत्तरित सवाल।
मां से बात करते वक्त जरा भी नहीं झलका था दर्द
मंगलवार की रात करीब नौ बजे वैष्णवी ने अपनी मां का नंबर मिलाया था। बेटी और मां के बीच रोजमर्रा की बातें हुईं। हंसी-मजाक हुआ, घर-परिवार का हालचाल लिया गया। बातचीत में एक पल के लिए भी ऐसा नहीं लगा कि वैष्णवी के मन में कोई उथल-पुथल मची है या वह किसी गहरे तनाव से जूझ रही है। फोन कटने के ठीक दो घंटे बाद जब ससुराल से वैष्णवी के चले जाने की खबर सोनभद्र पहुंची, तो मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। मृतका के मामा जितेंद्र की आंखें नम हैं और आवाज में भारी आक्रोश। उनका कहना है कि जो लड़की दो घंटे पहले बिल्कुल सामान्य थी, वह अचानक अपनी जान कैसे ले सकती है? जन्माष्टमी से दो दिन पहले ही तो वह मायके से हंसते-खेलते ससुराल लौटी थी।
रसोई की वो आखिरी रोटियां और सूना पड़ा कमरा
पति सूरज गुप्ता रेडमा चौक पर फोटोकॉपी की छोटी सी दुकान चलाता है। उसने बताया कि मंगलवार की रात वैष्णवी ने रोज की तरह ही पूरे मन से घर के पांच लोगों के लिए खाना पकाया था। खाना तैयार करने के बाद सूरज एक निजी अस्पताल में भर्ती अपने किसी परिचित को टिफिन पहुंचाने निकल गया। चूल्हा अभी ठीक से ठंडा भी नहीं हुआ था कि पीछे से यह अनहोनी हो गई। पति का दावा है कि जब वह अस्पताल से लौटा तो कमरा भीतर से बंद था और वैष्णवी फंदे से लटक रही थी। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, पर डॉक्टरों के पास केवल मौत की पुष्टि करने के सिवा कुछ नहीं बचा था।
अस्पताल की वो रात, पुलिस की रोक और दहेज के भारी आरोप
अस्पताल में वैष्णवी की मौत की पुष्टि होते ही ससुराल पक्ष के लोग शव को घर ले जाने की जल्दी में थे। वे शायद बिना लिखा-पढ़ी के ही सब समेट लेना चाहते थे, लेकिन वहां तैनात पुलिस जवानों ने उन्हें रोक लिया और साफ कहा कि कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बिना शव नहीं हिलेगा। सुबह होते-होते सोनभद्र से रोते-बिलखते मायके वाले पहुंचे तो अस्पताल परिसर का माहौल चीत्कारों से भर गया। मायके वालों का सीधा आरोप है कि कम दहेज को लेकर बेटी को लगातार ताने दिए जाते थे, उसे सताया जाता था। उनका कहना है कि यह खुदकुशी नहीं बल्कि सीधे तौर पर हत्या है, जिसे फंदे का रूप देकर छिपाने की कोशिश की गई है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर सच तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन इन सबके बीच एक हंसती-खेलती बेटी की जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है।
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