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Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग के दफ्तर के घेराव को भारतीय जनता पार्टी ने संवैधानिक संस्थाओं को दबाने की कोशिश बताया है। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को कांग्रेस के इस प्रदर्शन पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने साफ कर दिया था कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सबकी सहमति से हुए हैं। इसके बाद भी कांग्रेस तथ्यों पर बात करने के बजाय कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतार रही है, जो पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।
पूर्व चुनाव आयुक्तों को दिए गए पदों पर उठाए सवाल
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जो कांग्रेस आज आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है, उसे पहले अपना इतिहास खंगालना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम. एस. गिल रिटायर होने के बाद कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री बने। वहीं पूर्व सीईसी टी. एन. शेषन को भी कांग्रेस ने अहमदाबाद से लोकसभा का टिकट देकर मैदान में उतारा था। शाहदेव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है और अब जब चीजें नियमों के मुताबिक हो रही हैं, तो पार्टी को परेशानी हो रही है।
पुराने विवादों की दिलाई याद, निष्पक्षता पर घेरा
भाजपा प्रवक्ता ने नवीन चावला और आरवीएस शास्त्री के दौर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की थी, लेकिन उस समय की यूपीए सरकार ने उसे दरकिनार कर दिया। इतना ही नहीं, बाद में चावला को ही मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया। उस दौरान चावला के पारिवारिक ट्रस्ट को कांग्रेसी सांसदों से चंदा मिलने के भी गंभीर आरोप लगे थे। प्रतुल ने कहा कि अस्सी के दशक में भी मुख्य चुनाव आयुक्त रहे आरवीएस शास्त्री के अधिकारों को सीमित करने के लिए उनकी मर्जी के खिलाफ दो और आयुक्तों की नियुक्ति कर दी गई थी।
बिना सबूत दबाव बनाने की राजनीति बंद करे कांग्रेस
मौजूदा चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए प्रतुल शाहदेव ने कहा कि वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान ज्ञानेश कुमार चुनाव कराने की प्रक्रिया में शामिल तक नहीं थे। उन सभी चुनावों में जनता ने भाजपा को भारी बहुमत देकर जिताया। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव आयोग का घेराव करना किसी भी तरह से लोकतंत्र को बचाना नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र संस्थाओं पर दबाव डालकर मनमाफिक फैसले कराने की पुरानी चाल है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को नसीहत दी कि अगर उनके पास कोई ठोस सबूत हैं तो वे हवा में बयानबाजी करने के बजाय दस्तावेज देश के सामने रखें।
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