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Ranchi : आधी रात का वक्त। फोन की घंटी बजती है और एक पुलिस पदाधिकारी नींद से उठकर फिर ड्यूटी पर निकल जाता है। घर में बच्चे पूछते हैं, “पापा फिर जा रहे हैं?” जवाब छोटा होता है, “ड्यूटी है।” रांची की सड़कों पर रोज की तरह पुलिस की गाड़ियां दौड़ती हैं। थानों में फरियादी आते हैं, केस दर्ज होते हैं, छापेमारी होती है। ऊपर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर पुलिस महकमे में एक बेचैनी पनप रही है। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें नियम के तहत कार्रवाई करने वाले पुलिस पदाधिकारियों पर ही सवाल खड़े किए गए। इसी को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने खुलकर नाराजगी जताई है।
नियम से काम किया, फिर भी कटघरे में
झारखंड पुलिस एसोसिएशन का कहना है कि हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां पुलिस पदाधिकारी ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की, लेकिन बाद में उन्हें ही धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा। बयान में साफ कहा गया है कि कुछ लोग अपने प्रभाव और कानूनी जानकारी का इस्तेमाल कर पुलिस पर अनैतिक काम करने का दबाव बना रहे हैं। यहां तक कि अदालत में भी अपने पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
डोरंडा और STSC थाना की घटनाएं बनीं मुद्दा
रांची के डोरंडा थाना और STSC थाना से जुड़े घटनाक्रम इन दिनों चर्चा में हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि कुछ अधिवक्ताओं ने अपनी बात मनवाने के लिए पुलिस पदाधिकारियों पर लगातार दबाव बनाया। अधिवक्ता मनोज टंडन से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया गया है। कहा गया कि कार से जुड़े विवाद के बाद जिस तरह का माहौल थाना प्रभारी और संबंधित अधिकारी के खिलाफ बनाया गया, उसने पूरे महकमे को चिंतित कर दिया है। एसोसिएशन ने यह सवाल भी उठाया कि अगर यही हरकत कोई आम आदमी करता तो क्या उसके साथ भी वही व्यवहार होता जो आज पुलिस अधिकारियों के साथ हो रहा है?
“वर्दी उतरवा लेंगे” जैसी धमकियां
एसोसिएशन का कहना है कि कुछ जगहों पर पुलिस पदाधिकारियों को खुलेआम वर्दी उतरवा लेने की धमकी दी गई। यहां तक कि न्यायालय परिसर में भी थाना प्रभारी को जेल भेजने की बात कही गई और उन्हें घेर लिया गया। एक सीनियर पुलिस अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम लोग हर दिन अपराधियों का सामना करते हैं। लेकिन जब नियम से काम करने के बाद भी हमें ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है, तो मन टूटता है।”
परिवार भी महसूस कर रहा दबाव
इन घटनाओं का असर सिर्फ दफ्तर तक सीमित नहीं है। घरों में भी इसका असर दिखने लगा है। कई पुलिसकर्मियों के परिवार चिंता में हैं। बच्चों को स्कूल में सवालों का सामना करना पड़ता है। पत्नी को रिश्तेदार फोन कर पूछते हैं कि क्या हुआ। एक जवान की पत्नी ने कहा, “वो दिन-रात ड्यूटी करते हैं। त्योहार हो या शादी, उन्हें छुट्टी नहीं मिलती। अगर अब उन्हें ही डर में जीना पड़े, तो हम क्या सोचें?”
आंदोलन की राह पर एसोसिएशन
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने साफ कहा है कि अगर किसी पुलिस पदाधिकारी पर नियम के खिलाफ कार्रवाई होती है तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी गई है। जरूरत पड़ी तो काम से दूरी बनाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यह सिर्फ एक अधिकारी की बात नहीं है, बल्कि पूरे बल के सम्मान और मनोबल का सवाल है।
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