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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : शादी के घर में सबसे ज्यादा रौनक उस दिन होती है, जब पहली बार रिश्ता सबके सामने तय होता है। गीत-संगीत की तैयारी, बच्चों की चहल-पहल, महिलाओं की हंसी और परिवार वालों के चेहरे पर उम्मीदों की चमक… सब कुछ वैसा ही था। बुधवार दोपहर करीब 02:30 बजे, भदानीनगर ओपी क्षेत्र के मतकमा चौक स्थित राजनंदनी पार्क होटल एंड रिसोर्ट रेस्टुरेंट में दो परिवार रिंग सेरेमनी के लिए जुटे थे। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जिस जगह को खुशी का मंच बनाया गया है, वही जगह कुछ ही सेकंड में डर और दर्द का कारण बन जाएगी।
पूजा के बाद तैयारी का माहौल, तभी टूट गई छत
कार्यक्रम शुरू हुआ था परंपरा के अनुसार। पहले चरण में पुरोहित ने पूजा कराई। पूजा के बाद लड़की पक्ष की महिलाएं और बच्चे होटल के एक कमरे में बैठकर रिंग सेरेमनी की तैयारी कर रहे थे। कोई बच्चों के कपड़े ठीक कर रहा था, कोई मेकअप का सामान संभाल रहा था, कोई हंसते हुए फोटो खिंचवाने की बात कर रहा था। उसी बीच अचानक ऊपर से एक तेज आवाज आई। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही कमरे की छत पर लगी एसबेस्टस सीट जोरदार आवाज के साथ टूटकर नीचे गिर गई। कमरे में बैठे लोग पल भर में दबने लगे। चीख-पुकार मच गई। धूल का गुबार उठ गया। कुछ सेकंड तक किसी को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है।

बच्चों की चीख, मांओं की घबराहट, भागकर बचाई जान
हादसे के बाद कमरे में अफरा-तफरी फैल गई। महिलाएं अपने बच्चों को ढूंढने लगीं। कुछ लोग गिर पड़े, कुछ को चोट लगी, कुछ घबराकर दरवाजे की तरफ भागे। कमरे में मौजूद लोगों ने बताया कि बच्चों की चीख सुनकर कई महिलाएं बदहवास हो गईं। कोई अपने बच्चे को सीने से लगाकर रो रही थी, कोई किसी घायल को उठाने की कोशिश कर रही थी। लोग किसी तरह एक-दूसरे को सहारा देकर बाहर निकले। लेकिन खुशी का वो माहौल अब पूरी तरह डर में बदल चुका था।

आठ लोग घायल, छोटे बच्चे भी शामिल
इस हादसे में महिलाओं और बच्चों समेत आठ लोग घायल हो गए। घायलों में ममता कुमारी (पिता महेश पासवान, सेंट्रल सौंदा), ममता भारती, ममता क्यांश (4 वर्ष), अमीषा, आरती, रानी, फुचकी और प्रियांशु शामिल हैं। घायलों को तत्काल एंबुलेंस और निजी वाहनों से सदर अस्पताल रामगढ़ भेजा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद कई लोग सदमे में आ गए। कुछ महिलाएं लगातार रो रही थीं और बार-बार बस यही कह रही थीं कि “भगवान ने बचा लिया, नहीं तो बड़ा हादसा हो जाता।”
वर पक्ष दूसरे कमरे में था, इसलिए बच गए
घटना के समय वर पक्ष के लोग दूसरे कमरे में मौजूद थे। वर पक्ष चितरपुर निवासी रोहित कुमार (पिता विशाल पासवान) के परिवार के लोग उसी होटल में थे, लेकिन वे जिस कमरे में थे वहां कोई नुकसान नहीं हुआ। वर पक्ष के लोगों ने बताया कि अगर दोनों परिवार एक ही कमरे में होते तो हादसा और बड़ा हो सकता था।

जश्न की जगह बना डर का मंजर
होटल के जिस कमरे में रिंग सेरेमनी की तैयारी हो रही थी, वहां कुछ देर पहले तक लोग शादी के गीतों की बातें कर रहे थे। महिलाएं कपड़ों और गहनों की चर्चा कर रही थीं। बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे। लेकिन हादसे के बाद वही कमरा टूटे हुए एसबेस्टस के टुकड़ों और धूल से भर गया। कुर्सियां बिखर गईं। लोग बदहवास होकर बाहर खड़े थे। किसी के सिर से खून बह रहा था तो किसी के हाथ-पैर में चोट लगी थी। कुछ लोगों का कहना था कि “यह शादी का दिन था, लेकिन यह दिन जिंदगी भर याद रहेगा, खुशी के लिए नहीं, डर के लिए।”
हादसे के बाद संचालक फरार
घटना के बाद होटल प्रबंधन पर सवाल उठने लगे। लोगों का आरोप है कि हादसा होते ही होटल के संचालक मौके से फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि अगर होटल की छत और भवन की नियमित जांच होती, तो यह हादसा रोका जा सकता था। लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि जिस होटल को मोटी रकम देकर बुक कराया गया, वहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी।
पुलिस मौके पर पहुंची, कार्रवाई की बात
घटना की सूचना मिलते ही भदानीनगर ओपी प्रभारी अख्तर अली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। ओपी प्रभारी ने बताया कि यदि पीड़ित पक्ष लिखित शिकायत देता है तो होटल संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पीड़ितों का आरोप, सुरक्षा शून्य, बस पैसा वसूली
घटना के बाद लड़की पक्ष के लोगों ने होटल के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि होटल में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह शून्य है। पीड़ितों का कहना है कि होटल प्रबंधन सिर्फ पैसा लेकर बुकिंग करता है, लेकिन भवन की हालत और छत की मजबूती पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। लोगों ने मांग की है कि होटल संचालक पर कड़ी कार्रवाई हो और घायलों के इलाज का खर्च भी होटल प्रबंधन से लिया जाए।
सवाल जो अब खड़े हो रहे हैं
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। शादी जैसे कार्यक्रम में बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा मौजूद रहते हैं। ऐसे में होटल जैसी जगहों की जिम्मेदारी बनती है कि वे भवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एसबेस्टस सीट किसी बच्चे के सिर पर सीधे गिर जाती तो जान भी जा सकती थी।
अब इलाज के साथ इंसाफ की उम्मीद
सदर अस्पताल रामगढ़ में घायलों का इलाज जारी है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवारों की नजर प्रशासन और पुलिस पर टिकी है। जिस दिन अंगूठी पहनाकर रिश्ते की शुरुआत होनी थी, उसी दिन घरवालों ने अपनों को खून से लथपथ देखा। अब परिवार यही कह रहा है कि “खुशी तो चली गई, कम से कम न्याय मिल जाए।”
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