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Ranchi : जब किसी मरीज की पित्त की नली में बड़ी और पेचीदा पथरी फंस जाती है, तो उसकी जिंदगी दर्द, पीलिया और इंफेक्शन के बीच फंसी नजर आती है। ऐसे में मरीज और उसके परिजन अक्सर घबराकर दिल्ली या मुंबई भागने की तैयारी करने लगते हैं। लेकिन रांची के सीनियर और कुशल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जयंत कुमार घोष ने अपने हुनर और लगन से इस सोच को बदल दिया है। डॉ. घोष ने हाल ही में बैंकॉक में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल कार्यक्रम में यह साबित कर दिखाया कि रांची के डॉक्टर भी दुनिया के किसी बड़े अस्पताल से कम नहीं हैं। उन्होंने पित्त की नली से जटिल पथरी निकालने की अपनी खास तकनीक से विदेशी डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया।

बैंकॉक में विदेशी विशेषज्ञों ने भी माना लोहा
थाईलैंड के बैंकॉक शहर में मौजूद क्लांग अस्पताल में हाल ही में दो दिनों का इंटरनेशनल एंडोस्कोपी लेवल-2 ट्रेनिंग प्रोग्राम हुआ। इसमें भारत, थाईलैंड और फिलीपींस के जाने-माने चौबीस विशेषज्ञ डॉक्टर जुटे थे। भारत की चुनिंदा टीम में रांची का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. जयंत घोष शामिल हुए। इस मंच पर जब डॉ. घोष ने अपने जटिल ऑपरेशन का अनुभव साझा किया, तो वहां मौजूद दुनिया भर के डॉक्टरों ने उनकी प्रतिभा और काम की मुक्तकंठ से सराहना की। यह सिर्फ डॉ. घोष के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के चिकित्सा जगत के लिए गर्व का पल था।

डॉ. घोष का कमाल, कैमरे से देखकर तोड़ी फंसी पथरी
डॉ. जयंत घोष ने रांची के ऑर्किड हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में एक ऐसा जटिल केस सुलझाया था जिसे सामान्य एंडोस्कोपी से ठीक करना लगभग नामुमकिन था। डॉ. घोष ने कोलांजियोस्कोपी और ईएचएल तकनीक का बेहद सटीक इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में पित्त की नली के अंदर सीधे कैमरा डालकर पथरी की सही स्थिति देखी गई और फिर ईएचएल की किरणों से उसे बारीक टुकड़ों में तोड़कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जिस सटीकता और धैर्य के साथ डॉ. घोष ने इस पेचीदा काम को अंजाम दिया, वही उनकी सबसे बड़ी काबिलियत है।

हमेशा नया सीखने और सिखाने का जज्बा
डॉ. जयंत घोष की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वे कभी पुरानी लकीर पर नहीं चलते। मरीजों को कम से कम दर्द और बेहतर इलाज देने के लिए वे हमेशा आधुनिक मेडिकल तकनीकों को अपनाने में आगे रहते हैं। बैंकॉक के इस खास कार्यक्रम में डॉ. घोष ने सिर्फ अपना अनुभव ही नहीं बांटा, बल्कि ईयूएस, ईएसडी और ईएमआर जैसी दुनिया की सबसे एडवांस तकनीकों का गहन प्रशिक्षण भी हासिल किया। वहां भारतीय दल के मेंटर और मुंबई के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. अमित मायदेव और हैदराबाद के डॉ. नवीन पोलावरापु ने भी डॉ. घोष के समर्पण की तारीफ की।

झारखंड और आसपास के राज्यों के लिए वरदान
डॉ. जयंत घोष की इस बड़ी कामयाबी का सीधा फायदा अब रांची और आसपास के पूरे इलाके को मिलने जा रहा है। ऑर्किड हेरिटेज इंस्टीट्यूट में इन आधुनिक तकनीकों के शुरू होने से अब मरीजों को बड़े महानगरों में जाकर लाखों रुपये खर्च करने की मजबूरी नहीं रहेगी। झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मरीजों के लिए भी डॉ. घोष का यह प्रयास एक बड़ा वरदान साबित होगा। एक संवेदनशील डॉक्टर के रूप में डॉ. जयंत घोष ने यह दिखा दिया है कि अगर लगन पक्की हो तो अपने ही शहर में बैठकर मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज दिया जा सकता है।
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