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Ranchi : रेलगाड़ियों की छुकछुक, लाउडस्पीकर पर होती घोषणाएं और हाथों में भारी-भरकम सूटकेस थामे अपनी-अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए लपकते यात्री… बुधवार की दोपहर रांची रेलवे स्टेशन का नजारा हमेशा की तरह आपाधापी से भरा था। हर चेहरे पर सिर्फ एक ही फिक्र थी कि किसी तरह ट्रेन न छूट जाए। लेकिन तभी, स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार से ‘वंदे मातरम्’ की एक सुरीली, ओजस्वी और रूह को छू लेने वाली धुन हवा में तैरने लगी।
धुन में कुछ ऐसा जादुई खिंचाव था कि घड़ियों की टिक-टिक पर भागते कदमों की रफ्तार अचानक थम गई। भागदौड़ के बीच लोगों के सिर मुड़े, आंखें उस दिशा में टिकी और स्टेशन का वह व्यस्त कोना देखते ही देखते देशभक्ति के एक खूबसूरत संगम में बदल गया।
सुरमई धुनों पर थमे कदम, जागा राष्ट्रप्रेम
स्वतंत्रता दिवस में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन रांची स्टेशन पर इसका जज्बा बुधवार दोपहर से ही हिलोरें लेने लगा। मौका था RPF Band, ZTI/Kharagpur द्वारा आयोजित एक खास देशभक्ति कार्यक्रम का। दोपहर के ठीक 3:30 बजे जैसे ही आरपीएफ के बैंड सदस्यों ने अपने वाद्य यंत्रों पर पहली तान छेड़ी, प्लेटफॉर्म और गेट के आसपास फैली रोजमर्रा की नीरसता गायब हो गई।
ब्रास बैंड से निकलती ‘वंदे मातरम्’ और एक से बढ़कर एक देशभक्ति धुनों ने पूरे परिसर में एक नई ऊर्जा फूंक दी। जो यात्री चंद मिनट पहले घड़ी देखकर जल्दी-जल्दी कदम बढ़ा रहे थे, वे भी सूटकेस पर हाथ टिकाकर वहीं खड़े हो गए। संगीत का जादू ऐसा था कि मन की तमाम थकान गायब हो गई और हर दिल में राष्ट्रप्रेम की एक पावन लहर दौड़ पड़ी।
कुली, बच्चे और मुसाफिर… एक ही रंग में रंगे नजर आए
यह नजारा सिर्फ संगीत का नहीं, बल्कि लोगों के दिलों के जुड़ने का था। स्टेशन पर कंधे पर लाल कपड़ा बांधे मुसाफिरों का बोझ उठाने वाले कुली अपनी भारी गठरियां एक तरफ रखकर तालियां बजाने लगे। अपने माता-पिता की उंगली थामे गुजर रहे छोटे-छोटे बच्चे धुन की लय पर थिरकने लगे। वहीं, दूसरी ओर आरपीएफ के अधिकारी और मुस्तैद जवान सीना चौड़ा किए अपनी गर्व भरी मुस्कान के साथ इस ऐतिहासिक पल के गवाह बन रहे थे।
करीब 45 मिनट तक चले इस रूहानी सफर में 500 से 600 लोग एक साथ मौजूद थे। न कोई किसी से अनजान था, न किसी को जल्दी थी… सब के सब बस उन संगीतमय धुनों के जरिए अपनी भारत माता को नमन कर रहे थे। यात्रियों की तालियों की गड़गड़ाहट ने जवानों का हौसला और बढ़ा दिया।
रफ्तार भी वही, सुरक्षा भी तगड़ा
इतने भावुक और भीड़भाड़ वाले माहौल की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि स्टेशन की व्यवस्था में रत्ती भर भी खलल नहीं पड़ा। ट्रेनों की आवाजाही अपने तय वक्त पर होती रही और यात्रियों का आना-जाना भी बिना किसी रुकावट के जारी रहा।
पूरे कार्यक्रम का सफल और सुरक्षित आयोजन ASC/Ranchi पीएस नेगी के कुशल पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। RPF की टीम ने सुरक्षा के ऐसे तगड़े इंतजाम किए थे कि एक तरफ जहां राष्ट्रप्रेम का जश्न चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ रेल व्यवस्था भी अपनी पूरी रफ्तार से पटरी पर दौड़ती रही।
जाते-जाते दिलों में जल गई आजादी की मशाल
शाम को ठीक 4:15 बजे जब RPF बैंड ने अपनी अंतिम प्रस्तुति दी और कार्यक्रम संपन्न हुआ, तब तक माहौल पूरी तरह बदल चुका था। लोग अपनी-अपनी ट्रेनों की ओर बढ़े, लेकिन इस बार उनके चेहरों पर भागदौड़ की शिकन नहीं, बल्कि एक अजीब सा सुकून और गर्व से भरी चमक थी। रोजमर्रा जीवन की आपाधापी के बीच आरपीएफ बैंड की इस संगीतमय पहल ने न सिर्फ यात्रियों के थके हुए सफर में एक मीठी ताजगी भर दी, बल्कि स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले हर भारतीय के दिल में स्वाभिमान और आजादी के पावन पर्व की एक अलख जगा दी।
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