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Patna : आम आदमी की सबसे बड़ी परेशानी अक्सर कोई बहुत बड़ा काम नहीं, बल्कि वह छोटा सा सरकारी काम होता है जिसके लिए उसे कई बार दफ्तर का चक्कर लगाना पड़ता है। कभी आवेदन जमा करने के लिए, कभी कागज दिखाने के लिए और कभी सिर्फ यह पता करने के लिए कि काम हुआ या नहीं। बिहार में CM सम्राट चौधरी की पहल पर शुरू किया गया सहयोग शिविर इसी परेशानी को कम करने की कोशिश कर रहा है। सरकार ने व्यवस्था को गांव की पंचायत तक पहुंचाने का फैसला लिया और अब इसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं।
19 मई 2026 से शुरू हुए सहयोग शिविर के तीन महीनों में 6 लाख 46 हजार 181 आवेदन मिले हैं। इनमें से 6 लाख 20 हजार 30 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। यानी करीब 96 फीसदी मामलों का समाधान हो चुका है। करीब 4 फीसदी आवेदन अभी लंबित हैं। यह आंकड़ा बताता है कि पंचायत स्तर पर लोगों की समस्याएं सुनने और उन्हें संबंधित विभाग तक पहुंचाकर कार्रवाई कराने की व्यवस्था ने काफी तेजी पकड़ी है।
CM सम्राट चौधरी की इस पहल की खास बात यही है कि सरकार को लोगों के पास पहुंचाने पर जोर दिया गया है। आम तौर पर ग्रामीणों को अपनी समस्या लेकर प्रखंड या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, लेकिन सहयोग शिविर में अधिकारी पंचायत में पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों का समय, पैसा और मेहनत बच रही है।
CM सम्राट चौधरी ने गांव से शुरू की पहल, अब हजारों पंचायतों तक पहुंचा अभियान
सहयोग शिविर की शुरुआत CM सम्राट चौधरी ने 19 मई को सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग गांव से की थी। शुरुआत गांव से हुई और अब यह व्यवस्था हजारों पंचायतों तक पहुंच चुकी है। राज्य की कुल 8 हजार 32 पंचायतों में से 6 हजार 533 पंचायतों में अब तक शिविर आयोजित किया जा चुका है। राज्य के सभी 534 प्रखंडों में भी शिविर लग चुका है।
यह पहल इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसे सिर्फ एक बार का कार्यक्रम नहीं बनाया गया है। हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायतों में सहयोग शिविर लगाया जा रहा है। लोगों को अपनी समस्या बताने और आवेदन देने के लिए किसी बड़े सरकारी कार्यालय तक जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
सरकार ने आवेदनों के निपटारे के लिए 30 दिन की समय सीमा भी तय की है। इससे लोगों को यह भरोसा रहता है कि उनका आवेदन सिर्फ फाइल में दबकर नहीं रह जाएगा, बल्कि उस पर तय समय के भीतर कार्रवाई की जानी है। मुख्यमंत्री सचिवालय से इसकी नियमित निगरानी की जा रही है।
एक दिन पंचायत का, दूसरे दिन मुख्यमंत्री खुद सुनते हैं जनता की परेशानी
सम्राट चौधरी की पहल की एक और खास बात यह है कि महीने के दूसरे मंगलवार को राज्यस्तरीय सहयोग शिविर आयोजित किया जाता है। इसमें मुख्यमंत्री खुद लोगों की समस्याएं सुनते हैं। यानी पंचायत से लेकर मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायतों को सुनने और उनके समाधान की व्यवस्था तैयार की गई है।
ग्रामीण इलाकों में किसी व्यक्ति के लिए प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचना भी कई बार आसान नहीं होता। आने-जाने का किराया, काम छोड़कर पूरा दिन लगाना और फिर भी समाधान की कोई गारंटी न होना लोगों की परेशानी बढ़ा देता है। सहयोग शिविर ने कम से कम शिकायत दर्ज कराने की इस मुश्किल को काफी हद तक आसान किया है।
शिविर में जनता से जुड़ी अलग-अलग तरह की समस्याएं सामने आती हैं। अधिकारी मौके पर आवेदन लेते हैं और उसे संबंधित विभाग को भेजकर समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं। 96 फीसदी मामलों का निपटारा होना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था को सिर्फ कागज पर रखने के बजाय उसे जमीन पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।
6.20 लाख मामले निपटे, बाकी पंचायतों में भी जल्द लगेगा शिविर
तीन महीने में 6 लाख 46 हजार 181 आवेदन और उनमें से 6 लाख 20 हजार 30 मामलों का निपटारा एक बड़ा आंकड़ा है। अभी करीब 4 फीसदी मामले लंबित हैं। इन मामलों को भी जल्द निपटाने पर जोर दिया जा रहा है।
आवेदनों के निष्पादन के मामले में शेखपुरा, सहरसा, शिवहर, खगड़िया, भोजपुर, जमुई, गोपालगंज, अरवल, पश्चिम चंपारण और बांका जिले टॉप दस में शामिल हैं। इन जिलों में प्राप्त आवेदनों के तेजी से समाधान पर प्रशासन की ओर से काम किया गया है।
अब सरकार का अगला लक्ष्य बची हुई पंचायतों तक सहयोग शिविर पहुंचाना है। 8 हजार 32 पंचायतों में से 6 हजार 533 पंचायतों में शिविर लग चुका है। बाकी पंचायतों में आने वाले एक-दो शिविरों के दौरान आयोजन किए जाने की तैयारी है।
खास बात यह है कि सभी पंचायतों में शिविर लग जाने के बाद भी यह व्यवस्था खत्म नहीं होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर सहयोग शिविर आगे भी लगातार आयोजित किए जाएंगे। यानी सरकार की कोशिश एक ऐसा रास्ता तैयार करने की है, जहां गांव का आदमी अपनी समस्या लेकर पहले अपने पंचायत स्तर पर ही पहुंचे और उसे समाधान के लिए अनावश्यक रूप से इधर-उधर भटकना न पड़े।
CM सम्राट चौधरी की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यही दिखाई देता है कि सरकारी व्यवस्था और आम लोगों के बीच की दूरी कम करने की कोशिश हुई है। आंकड़े भी इसका साथ दे रहे हैं। तीन महीने में करीब 96 फीसदी मामलों का निपटारा बताता है कि लोगों की समस्याएं सिर्फ सुनी नहीं जा रहीं, बल्कि उनके समाधान पर भी काम हो रहा है।
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