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Jamshedpur : खूंखार महिला नक्सली शकुंतला उर्फ गुप्ता के कोलकाता पुलिस के सामने सरेंडर की खबर के बाद झारखंड की एक पुरानी और दर्दनाक घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। यही वह नाम है, जिसे 2007 में जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की हत्या से जोड़कर देखा जाता है। इल्जाम है कि बाकरिया गांव के फुटबॉल मैदान में हुए इस हमले की साजिश में शकुंतला की अहम भूमिका थी। करीब 19 साल पहले हुई इस घटना ने पूरे झारखंड को हिला दिया था। एक खेल के मैदान में अचानक गोलियों की लड़तड़ाहट गूंजी और देखते ही देखते खुशियों का माहौल मातम में बदल गया था।
फुटबॉल मैच देखने पहुंचे थे सांसद, किसी को नहीं था खतरे का अंदाजा
घटना 4 मार्च 2007 की है। जमशेदपुर जिले के बाकरिया गांव में फुटबॉल मैच का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर जमशेदपुर के सांसद सुनील महतो पहुंचे थे। मैदान में उस समय उत्साह का माहौल था। लोग मैच का आनंद ले रहे थे और सांसद के स्वागत में जुटे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह जगह खून से लाल हो जाएगी। मैच चल ही रहा था कि अचानक हथियारों से लैस नक्सलियों का दस्ता मैदान में पहुंच गया। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
कुछ मिनटों में खत्म हो गईं चार जिंदगियां
अचानक हुई गोलीबारी से पूरे मैदान में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका थर्रा उठा। इस हमले में सांसद सुनील महतो, उनके दो अंगरक्षक और झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक स्थानीय नेता की मौके पर ही मौत हो गई। देखते ही देखते फुटबॉल का मैदान एक दर्दनाक मंजर में बदल गया। कुछ ही मिनटों पहले जहां लोग खेल देख रहे थे, वहां अब सिर्फ चीखें, डर और खामोशी बची थी।
हत्या के बाद नक्सलियों ने मनाया था जश्न
इस हत्याकांड का सबसे भयावह पहलू वह था, जिसकी चर्चा आज भी होती है। इल्जाम है कि सांसद की हत्या के बाद शकुंतला ने मौके पर जश्न मनाया था। बताया जाता है कि हमले के बाद जब मैदान खाली हो गया और वहां सिर्फ लाशें पड़ी थी, तब शकुंतला ने सांसद के शव पर चढ़कर हथियार लहराया था। इस घटना को लेकर उस समय काफी आक्रोश देखा गया था। यह वारदात नक्सली हिंसा के इतिहास की सबसे खौफनाक घटनाओं में गिनी जाने लगी।
11 नक्सलियों की मौत का बदला लेने की थी बात
पुलिस जांच में सामने आया था कि इस हमले के पीछे बदले की भावना भी एक बड़ी वजह थी। दरअसल, जमशेदपुर के लांगो गांव में ग्रामीणों ने एकजुट होकर 11 नक्सलियों को मार गिराया था। इस घटना के बाद नक्सली संगठन काफी नाराज था। नक्सलियों का आरोप था कि इस कार्रवाई के पीछे सांसद सुनील महतो की भूमिका थी। इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। शकुंतला पर आरोप लगा कि उसने अपने साथियों की मौत का बदला लेने के लिए इस हमले की योजना बनाई थी।
बचपन में ही जुड़ गई थी नक्सली संगठन से
शकुंतला मूल रूप से पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी इलाके की रहने वाली बताई जाती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसने बहुत कम उम्र में ही नक्सली संगठन का दामन थाम लिया था। कहा जाता है कि करीब 10 साल की उम्र में ही वह संगठन से जुड़ गई थी। इसके बाद वह धीरे-धीरे नक्सली गतिविधियों में सक्रिय होती चली गई। सुरक्षाबलों से बचने के लिए उसने कई नामों का इस्तेमाल किया। कभी वह वर्षा के नाम से जानी गई तो कभी परी और गुप्ता नाम से भी पहचान बदली।
अतुल महतो से मुलाकात के बाद बढ़ी सक्रियता
साल 2005 में शकुंतला की मुलाकात झारग्राम इलाके के नक्सली स्क्वाड कमांडर अतुल महतो से हुई। संगठन में काम करने के दौरान दोनों करीब आए और बाद में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद शकुंतला नक्सली गतिविधियों में और ज्यादा एक्टिव हो गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह कई बड़ी घटनाओं में शामिल रही। अब वर्षों बाद शकुंतला के सरेंडर से एक बार फिर 2007 के सुनील महतो हत्याकांड की चर्चा शुरू हो गई है।
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