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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा में गुरुवार को जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक अहम बैठक की। नगर भवन में हुई इस कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त दिनेश यादव ने की। बैठक का विषय PC&PNDT Act 1994 और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 से जुड़ी तैयारियां और जरूरी बदलाव रहे। कार्यक्रम की शुरुआत डीसी दिनेश यादव, SDO रंका रुद्र प्रताप और सिविल सर्जन डॉ. जे एफ कैनेडी ने दीप जलाकर की। सभी मेडिकल प्रैक्टिशनरों, निजी अस्पताल संचालकों और क्लिनिक प्रतिनिधियों को बुलाया गया था, ताकि नियमों को स्पष्ट रूप से समझाया जा सके।
डीसी ने दी सख्त चेतावनी
डीसी ने साफ कहा कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं और इन्हें तुरंत सुधारने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अब हर क्लिनिक और अस्पताल का संचालन केवल योग्य और प्रमाणित डॉक्टर ही करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में डॉक्टर के नाम, हेल्पलाइन नंबर, ड्यूटी चार्ट और क्लिनिक अथॉरिटी सर्टिफिकेट जैसी जानकारी साफ तौर पर लगी होनी चाहिए।
पंजीकरण अनिवार्य, उल्लंघन पर कार्रवाई
DC ने निर्देश दिया कि जो भी अस्पताल या क्लिनिक अब तक पंजीकृत नहीं हैं, वे तुरंत रजिस्ट्रेशन कर लें। नियमों का उल्लंघन करने वालों को दो बार नोटिस दिया जाएगा और सुधार नहीं हुआ तो केंद्र को सील कर दिया जाएगा। बिल्डिंग भी तय मानकों के अनुसार ही होनी चाहिए, जिसमें पार्किंग, फायर सेफ्टी और जरूरी सुविधाएं शामिल हों।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर खास नजर
बैठक में बताया गया कि हर अल्ट्रासाउंड केंद्र में डॉक्टर की फोटो, नाम, मोबाइल नंबर और “यहां लिंग परीक्षण नहीं होता” का बोर्ड लगाना जरूरी है। लाइसेंस नवीनीकरण के बिना केंद्र चलाने पर सीधी कार्रवाई होगी।
सिविल सर्जन का बयान
सिविल सर्जन डॉ. कैनेडी ने कहा कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का उद्देश्य पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं को एक समान और बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रैक्टिशनरों को सही जानकारी देकर व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
सुझाव और शिकायतें भी सुनी गईं
कार्यशाला में मौजूद चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी दिक्कतें और सुझाव रखे। उपायुक्त ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि अवैध हॉस्पिटलों और अयोग्य चिकित्सकों के लिए तुरंत जांच अभियान शुरू किया जाए और निरीक्षण फॉर्मेट तैयार कर टीमों को सौंपा जाए।
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