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Ranchi : रांची में एक लंबे समय से चल रहे विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को साफ फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में भवन निर्माण और मानचित्र पास करने का पूरा अधिकार ग्राम पंचायतों के पास है। अगर पंचायती राज अधिनियम लागू है, तो जेआरडीए की वे धाराएं लागू नहीं होंगी जो पंचायतों के अधिकार से टकराती हैं।
सिदरौल के लोगों की दिक्कत को लेकर मामला पहुंचा हाईकोर्ट
यह मामला तब शुरू हुआ जब नामकुम के सिदरौल गांव में रहने वाले कुछ लोगों ने पंचायत से अनुमति लेकर घर बनाए। कई साल बाद रांची रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी। जेआरडीए ने कहा कि लोगों ने सेक्शन 30 के तहत अनुमति नहीं ली, इसलिए इमारतें अवैध हैं और उन्हें गिराया जा सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा, पंचायत से अनुमति ली थी
इस कार्रवाई को ग्रामीणों ने चुनौती दी। सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। याचिकाकर्ताओं के वकील कुमार हर्ष ने बताया कि यह पूरा इलाका पंचायत क्षेत्र है और यहां भवन मानचित्र और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार पंचायत को है।
पंचायत को तीसरे स्तर की सरकार माना जाए : कोर्ट
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पंचायत अब केवल योजनाएं लागू करने वाली संस्था नहीं है। उसे स्थानीय विकास और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले खुद करने का अधिकार है। इसमें ग्रामीण आवास और भवन अनुमति देना भी शामिल है।
दोहरी अनुमति का सवाल खत्म, पंचायत का आदेश मान्य
कोर्ट ने माना कि जेआरडीए की धारा 30 सभी तरह के विकास कार्य पर अनुमति की बात करती है, जबकि पंचायती राज अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में यह अधिकार पंचायत को देता है। दोनों का साथ-साथ चलना संभव नहीं है। इसलिए जहां पंचायती राज अधिनियम लागू है, वहां जेआरडीए की इस धारा को लागू नहीं माना जाएगा।
सिदरौल में जेआरडीए का दखल गलत
कोर्ट ने साफ कहा कि सिदरौल जैसे पंचायत क्षेत्रों में जेआरडीए भवन मानचित्र पास नहीं कर सकता। इसलिए याचिकाकर्ताओं द्वारा बनाए गए भवन अवैध नहीं हैं और जेआरडीए की कार्रवाई सही नहीं थी।
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