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Home » लापता हिमांशु के वापसी की कहानी… डर नहीं, भरोसे से काम कर गए सदर थानेदार
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लापता हिमांशु के वापसी की कहानी… डर नहीं, भरोसे से काम कर गए सदर थानेदार

April 10, 2026No Comments6 Mins Read
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Ranchi : घर का इकलौता बेटा अचानक गायब हो जाए, तो मां की सांसें अटकने लगती हैं और बाप का दिल हर पल किसी अनहोनी की आशंका से कांपता रहता है। रांची के दीपा टोली इलाके में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब नौवीं क्लास का स्टूडेंट हिमांशु मुंडा मम्मी-पापा से कहासुनी के बाद घर छोड़कर चला गया। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे अहम किरदार बनकर सामने आए सदर थानेदार इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार, जिन्होंने सिर्फ पुलिसिंग नहीं की, बल्कि एक परिवार को भरोसा भी दिया, बच्चों को समझा भी और हालात को बिगड़ने से पहले संभाल लिया। नतीजा यह रहा कि हिमांशु सही सलामत घर लौट आया।

घर में एक ही बेटा, और अचानक गायब हो गया

हिमांशु मुंडा DAV पब्लिक स्कूल, बरियातू में नौवीं का छात्र है। वह सदर थाना क्षेत्र के दीपा टोली का रहने वाला है। पिता सरकारी नौकरी में हैं और मां प्राइवेट स्कूल में टीचर। हिमांशु उनकी इकलौती संतान है, यानी घर की सारी उम्मीदें और प्यार उसी पर टिका था। परिवार के मुताबिक, हिमांशु पिछले कुछ दिनों से चिड़चिड़ा रहने लगा था। घर में उसे समझाया जाता, कभी डांटा भी जाता। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि एक दिन वह गुस्से में घर छोड़कर चला जाएगा।

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आईफोन की चाहत और घर से पैसे निकालने की आदत

पुलिस जांच में सामने आया कि हिमांशु अपनी मां के पर्स से रोज 500 से 1000 रुपये निकाल लिया करता था। धीरे-धीरे उसने पैसे जमा किए और करीब 40 हजार रुपये में एक आईफोन खरीद लिया। यह फोन उसके लिए सिर्फ मोबाइल नहीं था, बल्कि एक ऐसी चीज बन गया था जिसे वह अपनी पहचान समझने लगा था। वह उसी फोन के साथ स्कूल जाने लगा।

स्कूल में पकड़ लिया गया फोन, माता-पिता को बुलाकर लगाई फटकार

एक दिन स्कूल में टीचर की नजर उस पर पड़ गई। हिमांशु के पास आईफोन देखकर स्कूल ने फोन जब्त कर लिया और उसे डांट लगाई। बाद में उसके माता-पिता को भी स्कूल बुलाया गया। वहां उन्हें भी खरी-खोटी सुनाई गई और चेतावनी देकर फोन लौटा दिया गया। यह घटना हिमांशु के मन पर चोट कर गई। घर में भी माहौल बिगड़ गया। माता-पिता ने उसे समझाया, लेकिन गुस्सा बढ़ता चला गया।

गलत संगत की चिंता और घर की डांट ने तोड़ दिया सब्र

पुलिस के मुताबिक हिमांशु कुछ ऐसे लड़कों की संगत में आ गया था जो नशे की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि पुलिस का कहना है कि हिमांशु ने कभी नशा नहीं किया, लेकिन उसके माता-पिता और खासकर मां बार-बार उसे उन लड़कों से दूर रहने की हिदायत देती थीं। इन्हीं बातों को लेकर एक दिन घर में उसे जोरदार फटकार लगी। बस उसी फटकार ने उसे अंदर से तोड़ दिया और वह बिना कुछ बताए घर छोड़कर निकल गया।

48 घंटे तक नहीं लौटा, मां की आंखों से नींद गायब हो गई

घंटे बीतते गए… शाम हुई… फिर रात। मां दरवाजे की तरफ बार-बार देखती रही। पिता फोन लगाते रहे। रिश्तेदारों को पूछते रहे। आसपास तलाश होती रही, लेकिन हिमांशु का कोई सुराग नहीं मिला। जब वह 48 घंटे तक वापस नहीं लौटा, तब घरवालों के लिए यह सिर्फ गुस्सा नहीं रहा, यह डर बन गया। डर इस बात का कि कहीं बच्चा गलत हाथों में न पड़ गया हो। और आखिरकार, परिवार सदर थाने पहुंच गया।

थानेदार कुलदीप कुमार ने सबसे पहले डर कम किया

यहां कहानी में इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार की एंट्री होती है। उन्होंने परिजनों को रोते-बिखरते देखा तो सबसे पहले पुलिसिया अंदाज नहीं दिखाया, बल्कि एक जिम्मेदार इंसान की तरह बात की। उन्होंने परिजनों से हौले से बस इतना कहा… “आपका बेटा सुरक्षित है… उसे कुछ नहीं होगा… वह सही सलामत लौटेगा।” यह वाक्य सिर्फ शब्द नहीं था। यह एक टूटते परिवार के लिए सहारा था। पिता को तसल्ली मिली, मां के चेहरे पर उम्मीद लौटी। उस भरोसे ने परिवार को संभाल लिया।

थानेदार खुद पहुंचे घर, दोस्तों से मिले और बच्चों को डांटा नहीं, समझाया

इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने केवल शिकायत दर्ज करके टीम नहीं भेजी, बल्कि खुद हिमांशु के घर पहुंचे। वहां उन्होंने हिमांशु के 3-4 दोस्तों से बातचीत की। बच्चे डरे हुए थे। उन्हें डर था कि पुलिस उन्हें भी पकड़ लेगी, पूछताछ करेगी या डांटेगी। लेकिन थानेदार ने वो किया जो अक्सर पुलिस नहीं करती… उन्होंने बच्चों को डांटने की जगह मोटिवेट किया। उन्होंने बच्चों से कहा…  “डरने की जरूरत नहीं है। अपने दोस्त को बुला लो। उसे या तुम लोगों को कोई कुछ नहीं कहेगा।” यह बात बच्चों के मन में उतर गई।

थानेदार समझ चुके थे, हिमांशु अपने दोस्तों के संपर्क में है

इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने हालात को बहुत जल्दी भांप लिया था। उन्हें अंदाजा हो गया था कि हिमांशु कहीं बहुत दूर नहीं गया है। वह अपने दोस्तों के संपर्क में जरूर होगा। यहीं उनकी सूझबूझ काम आई। उन्होंने दबाव बनाने की जगह भरोसे की रणनीति अपनाई। बच्चों को भरोसे में लिया, डर खत्म किया और दोस्ती के रिश्ते को हथियार बना दिया।

मोटिवेशन रंग लाया, हिमांशु वापस लौट आया

थानेदार के शब्दों का असर हुआ। दोस्तों ने हिमांशु से संपर्क किया। उसे बताया गया कि कोई डांटेगा नहीं, कोई मार नहीं पड़ेगी, बस घर लौट आओ। कुछ समय बाद हिमांशु सामने आया। पुलिस ने उसे रामगढ़ इलाके से बरामद कर लिया और फिर सुरक्षित सदर थाना लाकर परिजनों के हवाले कर दिया।

बेटे को देखकर मां रो पड़ी, पिता ने ली राहत की सांस

जब हिमांशु को उसके माता-पिता के हवाले किया गया तो वापस मां की आंखों में आंसू थे। पिता के चेहरे पर थकान थी, लेकिन उससे भी ज्यादा राहत। यह वही राहत थी जो दो दिनों से घर में गायब थी। घरवालों के लिए यह सिर्फ बेटे की वापसी नहीं थी, यह जिंदगी का सबसे बड़ा सुकून था।

थानेदार की अपील : बच्चों को डांटें नहीं, बात करें

इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने इस मामले के बाद साफ कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों के साथ लगातार बातचीत करनी चाहिए। बच्चों की हर हरकत पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि बच्चे खुद अपनी बात खुलकर कह सकें। उन्होंने कहा कि आजकल बच्चे जल्दी गुस्सा हो जाते हैं और कई बार छोटी बातों को बहुत बड़ा समझ लेते हैं। ऐसे में माता-पिता का व्यवहार और समझदारी सबसे बड़ा सहारा बनती है।

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