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Ranchi : ठंडी सुबह थी, हवा थोड़ी कड़वी थी, लेकिन रांची के चारों वृद्धाश्रमों में कुछ अलग ही गर्माहट उतर रही थी। चेहरे पर शिकन लिए बैठे कई बुजुर्ग उस दिन शायद रोज की तरह ही बीतने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि जल्द ही उनके कमरे मुस्कुराहटों से भरने वाले हैं।
नगड़ी के वृद्धाश्रम में उम्मीद की किरण
नगड़ी के ओल्ड-एज-होम के शांत आंगन में जब झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद पहुंचे तो कई आंखें चमक उठीं। वे किसी औपचारिकता की तरह नहीं आए थे। उन्होंने एक-एक बुजुर्ग का हाल पूछा, उनका हाथ थामा और मुस्कुराते हुए स्वेटर, कंबल और ड्राई फ्रूट दिए। किसी ने कहा, “बाबू, आज अपने बच्चे जैसा महसूस हुआ।” यह सुनकर न्यायमूर्ति बस हल्के से मुस्कुरा दिए और बोले, “बुजुर्गों की सेवा करना भगवान की सेवा जैसा है।” वहीं, झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना भी पूरे समय बुजुर्गों के साथ थीं। उन्होंने खुद स्टीक और कंबल बांटे और आश्वासन दिया कि इस तरह की पहल आगे भी चलती रहेगी।
टीम का हर कदम बुजुर्गों के नाम
उधर डीसी मंजुनाथ भजंत्री, झालसा के उप-सचिव अभिषेक कुमार और रांची डालसा के सचिव रवि कुमार भास्कर भी लगातार बुजुर्गों से बात कर रहे थे। किसी के जूते का साइज देख रहे थे, तो किसी की जरूरत के अनुसार योजना से जोड़ने की बात समझा रहे थे। वातावरण में एक सादगी भरा अपनापन था।

चिरौंदी में 13 बुजुर्गों की आंखें चमक उठीं
चिरौंदी के वृद्धाश्रम में यह दिन और भी खास रहा। यहां रहने वाले 13 बुजुर्गों को ठंड से बचाने वाली वस्तुएं दी गईं। सामान हाथ में लेते हुए एक बुजुर्ग महिला बोली, “अब रात में ठंड कम लगेगी, बेटा।” मौके पर मौजूद एनके भारती और अन्य लोग बस यही कह पाए, “यही हमारा मकसद है।”
हेसाग में सिर्फ कपड़े नहीं, सुनने की दुनिया भी लौटाई गई
हेसाग वृद्धाश्रम में 26 बुजुर्गों को गर्म कपड़े और चप्पल मिले। सात बुजुर्गों को श्रवण यंत्र (कान में लगाकर सुनने वाली मशीन) भी दिए गए। एक बुजुर्ग ने जैसे ही यंत्र लगाया, उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने धीरे से कहा, “अब आवाज साफ सुनाई दे रही है।” एडिशनल सचिव दीपक साहू और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए यह पल किसी उपलब्धि से कम नहीं था।

रातू में बुजुर्गों का दिन बना
रातू के रामावती वृद्धाश्रम में भी माहौल भावुक हो गया। जब स्वेटर, जूते और ड्राई फूड बांटे जा रहे थे, कई बुजुर्ग एक-दूसरे से कह रहे थे, “आज लग रहा है कोई अपना आया है।”
गर्माहट पहुंचाने की कोशिश
यह सिर्फ वितरण कार्यक्रम नहीं था। यह उन लोगों तक गर्माहट पहुंचाने की कोशिश थी, जिनकी जिंदगी अक्सर चुपचाप और अकेलेपन में गुजरती है। इन वृद्धाश्रमों में रहने वाले माता-पिता के लिए यह दिन ठंड में किसी चूल्हे की तरह था—धीमी, लेकिन दिल तक गर्माहट देने वाली रोशनी।

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