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Ranchi : रांची के खड़गड़ा बस स्टैंड पर लगे रैन-बसेरा की रोशनी दूर से ही बताती है कि यह जगह उन लोगों का आसरा है, जिनके पास रात गुजारने का कोई ठिकाना नहीं। सर्द हवाएं तेज हो चली हैं और शाम ढलते ही यहां कई मजदूर, रिक्शाचालक और राहगीर अपनी थकान उतारने पहुंचते हैं। लेकिन शनिवार की शाम यह शांत माहौल तभी बदला जब रैन-बसेरा में अचानक दो अधिकारी पहुंचे। यह 22 नवम्बर की रात थी। JHALSA यानी झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के उप सचिव अभिषेक कुमार और रांची DLSA यानी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रवि कुमार भास्कर बिना किसी पूर्व सूचना के शेल्टर होम पहुंच गए। दोनों अधिकारी अंदर गए और वहां बैठे लोगों से बातचीत शुरू की। किसी ने बताया कि वह दूसरे जिले से मजदूरी कर लौटा है और रात यहीं बिताता है। किसी ने कहा कि ठंड बढ़ गई है, इसलिए यह शेल्टर उसकी सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
जब बातचीत खत्म हुई और रजिस्टर खोलकर अभिलेख देखे गए, तो एक बात ने दोनों अधिकारियों को चौंका दिया। एक शख्स पिछले दो दिनों से यहीं ठहरा था, लेकिन उसका नाम कहीं दर्ज नहीं था। यह लापरवाही उन लोगों के लिए भी खतरा बन सकती है, जो यहां हर रात सुरक्षित रहने की उम्मीद से आते हैं। अधिकारी नाराज नहीं दिखे, लेकिन उनका रवैया साफ और दृढ़ था। उन्होंने शेल्टर प्रभारी को निर्देश दिया कि यहां ठहरने वाले हर व्यक्ति का नाम दर्ज होना चाहिए। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि सुरक्षा और पारदर्शिता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रजिस्टर रोज अपडेट हो और व्यवस्थाएं नियमों के मुताबिक चलें।
सर्दियों में रैन-बसेरा कई लोगों के लिए जीवन रक्षक जगह बन जाता है। यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए रात की शांति है जो फुटपाथों और खुले आसमान के नीचे सोने पर मजबूर हैं। ऐसे में सही रिकॉर्ड रखना, सुविधाओं की निगरानी करना और सब कुछ व्यवस्थित रखना बेहद जरूरी है।
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