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Home » आदिवासी जमीन पर कब्जे का इल्जाम, बिल्डर का दावा- रजिस्ट्री कानूनी
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आदिवासी जमीन पर कब्जे का इल्जाम, बिल्डर का दावा- रजिस्ट्री कानूनी

January 19, 2026No Comments6 Mins Read
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जमीन
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Ranchi : रांची में आदिवासी जमीन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। आदिवासी जन परिषद और अन्य संगठनों का कहना है कि जमीन कारोबार और विवाद अब अपराधियों के हाथ में चला गया है, लेकिन प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठा रहा। आदिवासी संगठनों का आरोप है कि जमीन से जुड़े मामलों में हमेशा आदिवासी समाज को ही निशाना बनाया जाता है। उनका कहना है कि मामूली विवाद में भी आदिवासियों की गिरफ्तारी हो जाती है, जबकि प्रभावशाली लोगों और भू माफियाओं पर कार्रवाई नहीं होती। इसी क्रम में शहर के जाने माने बिल्डर जितेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

रातू क्षेत्र की जमीन पर अवैध कब्जे का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने दावा किया कि रातू थाना क्षेत्र में आदिवासी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर एक कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। यह जमीन खाता संख्या 152 और प्लॉट संख्या 96 से जुड़ी बताई गई है, जिसका रकबा लगभग साढ़े चार एकड़ है। आरोप है कि न तो इस जमीन का वैध दाखिल खारिज हुआ है और न ही किसी तरह की कानूनी रसीद जारी की गई है।

फर्जी दस्तावेज और लोन का आरोप

संगठनों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन को सामान्य श्रेणी की दिखाया गया और उसी आधार पर निर्माण कार्य और बैंक लोन की प्रक्रिया पूरी की गई। यह सब आदिवासी जमीन संरक्षण कानून का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

आदिवासी संगठनों ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले स्थानीय थाना और जिला प्रशासन से की गई थी, लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। बाद में दिल्ली स्तर पर शिकायत के बाद आयोग के निर्देश पर केस दर्ज हुआ। इसके बावजूद संगठनों को आशंका है कि जांच में लीपापोती की जा सकती है।

रांची में निबंधन घोटाले का आरोप

संगठनों ने आरोप लगाया कि रांची जिले में जमीन निबंधन के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला चल रहा है। मोटी रकम लेकर आदिवासी और खतियानी जमीन का गलत तरीके से निबंधन और दाखिल खारिज किया जा रहा है, जबकि कानून में इस पर स्पष्ट रोक है।

मिलीभगत का शक

आदिवासी संगठनों का दावा है कि इस पूरे खेल में कुछ अंचल अधिकारी, कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। डबल जमाबंदी और फर्जी कागजात के जरिए जमीन हड़पने का काम किया जा रहा है। एक तरफ आदिवासी अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ माफिया खुलेआम सक्रिय हैं।

गिरफ्तारी और संपत्ति जांच की मांग

संगठनों ने मांग की है कि बिल्डर जितेंद्र सिंह समेत जमीन घोटाले से जुड़े सभी लोगों की तत्काल गिरफ्तारी हो। साथ ही उनकी संपत्ति की जांच कराई जाए और अवैध रूप से कब्जाई गई आदिवासी जमीन को मुक्त कराया जाए। अवैध निबंधन, लोन और संस्थानों की मान्यता रद्द करने की भी मांग उठाई गई है।

आंदोलन और राजभवन मार्च की चेतावनी

आदिवासी जन परिषद और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक आंदोलन करेंगे और राजभवन तक जाकर अपनी मांग रखेंगे। संगठनों का कहना है कि जमीन विवाद के कारण हिंसा, अपहरण और हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं और आदिवासी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

आदिवासी जमीन पर कब्जे का इल्जाम, बिल्डर का दावा- रजिस्ट्री कानूनी
रांची में आदिवासी जन परिषद के लोग क्या बोले… देखें वीडियो pic.twitter.com/vECzwxnYK5

— News Samvad (@newssamvaad) January 19, 2026

जमीन पूरी तरह वैध, झूठे आरोपों से बदनाम किया जा रहा है : जितेंद्र सिंह

रांची में आदिवासी जमीन विवाद को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर शहर के जाने माने बिल्डर जितेंद्र सिंह ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश करार दिया है और कहा है कि उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर झूठा मामला उछाला जा रहा है।

2005 से मेरे हिफाजत में है जमीन

जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह साल 2005 से उनकी हिफाजत में है। उन्होंने कहा कि जमीन किसी भी तरह से अवैध नहीं है और न ही आदिवासी जमीन कानून का उल्लंघन किया गया है।

2016 में पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई रजिस्ट्री

उन्होंने बताया कि साल 2016 में जमीन की रजिस्ट्री सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कराई गई थी। निबंधन, दस्तावेज सत्यापन और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं। अगर जमीन अवैध होती तो रजिस्ट्री संभव ही नहीं था।

कॉलेज संचालन पर भी कानून का पालन

कॉलेज संचालन के आरोपों पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को बिना वैध दस्तावेज और अनुमति के नहीं चलाया जा सकता। सभी आवश्यक स्वीकृतियां और प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कुछ गलत होता तो अब तक संबंधित विभाग कार्रवाई कर चुके होते।

कारोबारियों को फंसाकर वसूली का खेल

जितेंद्र सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में कारोबारियों के खिलाफ झूठे केस दर्ज कर वसूली का गोरखधंधा चल रहा है। कुछ सफेदपोश लोग भोले भाले लोगों को आगे कर केस दर्ज कराते हैं और फिर मामले को सुलझाने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जाती है।

आदिवासी समाज को भ्रमित किया जा रहा है

उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक और सामाजिक चेहरे आदिवासी समाज को जानबूझकर भ्रमित कर रहे हैं। भावनाओं को भड़काकर जमीन विवाद को तूल दिया जा रहा है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। इससे समाज में तनाव और अविश्वास बढ़ रहा है।

जांच से नहीं, साजिश से है आपत्ति

जितेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें किसी भी निष्पक्ष जांच से डर नहीं है। वे चाहते हैं कि मामले की जांच हो और सच्चाई सामने आए। लेकिन बिना तथ्य और सबूत के सार्वजनिक मंच से उन्हें दोषी ठहराना गलत है और यह कानून के खिलाफ है।

कानून पर भरोसा, सच आएगा सामने

उन्होंने अंत में कहा कि वे कानून पर पूरा भरोसा रखते हैं। समय आने पर सच्चाई खुद सामने आ जाएगी और झूठे आरोप लगाने वालों का असली चेहरा उजागर होगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि दबाव में नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

इसे भी पढ़ें : ओरमांझी से लापता कन्हैया कुमार मिला, कहां से… जानें

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