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Ranchi : नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले की रात। शहर की धड़कनें थोड़ी तेज हैं, लेकिन गलियों में डर नहीं… एक भरोसा तैनात है। शहर सोने की तैयारी में है, लेकिन रांची की सड़कों पर एक शख्स अपनी टीम के साथ पूरी तरह जाग रहा है… कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय। वर्दी में खड़ा यह अधिकारी सिर्फ आदेश देने वाला अफसर नहीं, बल्कि उस भरोसे का नाम बनकर सामने आया, जिसके दम पर लोकतंत्र निडर होकर मतदान करता है। डीएसपी प्रकाश सोय की लीडरशिप में फ्लैगमार्च निकाला गया। रांची की सड़कों पर पुलिस का यह फ्लैग मार्च सिर्फ सुरक्षा का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस विश्वास की मौजूदगी है, जिसके सहारे लोग सुबह बेफिक्र होकर मतदान केंद्र तक पहुंच सकें।
जब अफसर खुद सड़क पर उतरे, तो भरोसा अपने आप बढ़ गया
मतदान से पहले की रात आमतौर पर तनाव भरी होती है। अफवाहें, आशंकाएं और अनकहा डर। लेकिन इस बार नजारा अलग था। डीएसपी प्रकाश सोय खुद फ्लैग मार्च की अगुवाई कर रहे थे। न गाड़ी में बैठे, न दूरी बनाए, बल्कि जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए।
हिंदपीढ़ी से डेली मार्केट तक… हर गली, हर मोड़ पर नजर
हिंदपीढ़ी की तंग गलियां हों या डेली मार्केट की व्यस्त सड़कें, डीएसपी प्रकाश सोय ने अपनी टीम के साथ एक-एक इलाके का जायजा लिया। उन्होंने न सिर्फ मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया, बल्कि आसपास के रास्तों, अंधेरे कोनों और संभावित संवेदनशील बिंदुओं पर भी खास ध्यान दिया। जहां रोशनी कम दिखी, वहां तुरंत व्यवस्था के निर्देश दिए गए। जहां आशंका दिखी, वहां गश्त बढ़ा दी गई। लोग खिड़कियों से झांकते हुए पुलिस को गुजरते देख रहे थे। किसी ने कहा, “आज नींद अच्छी आएगी।”
फ्लैग मार्च : डर को दूर, भरोसे को करीब लाने की कवायद
फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस की कतारें जब मोहल्लों से गुजरीं, तो यह संदेश साफ था… कानून सबके साथ है। बच्चों ने हाथ हिलाए, बुजुर्गों ने दुआएं दीं। कई लोगों ने कहा कि चुनाव के वक्त अक्सर मन में डर रहता है, लेकिन इस बार माहौल अलग है। पुलिस की मौजूदगी ने डर की जगह भरोसा भर दिया।

बूथों का जायजा : हर छोटी बात पर बड़ी नजर
मतदान केंद्रों पर सिर्फ ताले-चौखट नहीं देखे गए, बल्कि आसपास की रोशनी, रास्तों की साफ-सफाई और गश्त की दिशा तक पर ध्यान दिया गया। प्रशिक्षु डीएसपी, कोतवाली थाना प्रभारी और अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। जवानों को साफ निर्देश मिले—गश्त लगातार रहे, किसी भी संदिग्ध हरकत पर तुरंत कदम उठे।
“मतदाता मुस्कुराकर वोट डाले, यही हमारी जीत”
कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय ने बातचीत में कहा, “हमारी कोशिश है कि कोई डर न हो, कोई दबाव न हो। हर मतदाता मुस्कुराकर वोट डाले, यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है।” उनके शब्दों में सख्ती भी थी और जिम्मेदारी की संवेदनशीलता भी।
आम लोगों की आवाज : ‘इस बार माहौल सुकून वाला है’
हिंदपीढ़ी के एक दुकानदार बोले, “पिछली बार डर लगा था, इस बार पुलिस हर जगह दिख रही है।” डेली मार्केट की एक महिला मतदाता ने कहा, “सुबह जल्दी वोट डालने जाएंगे, डर नहीं लग रहा।” ये छोटी-छोटी बातें बताती हैं कि सुरक्षा सिर्फ बंदूक से नहीं, भरोसे से भी बनती है।
शांतिपूर्ण चुनाव की तैयारी, इंसानियत के साथ
पूरे शहर में रांची पुलिस अलर्ट मोड में है। कंट्रोल रूम से निगरानी, अतिरिक्त बल की तैनाती और संवेदनशील इलाकों पर खास फोकस—सबका मकसद एक ही है: लोकतंत्र का त्योहार बिना किसी खलल के पूरा हो। यह सिर्फ एक फ्लैग मार्च नहीं था, यह उस भरोसे का मार्च था—जिसमें पुलिस और जनता साथ-साथ चलते हैं। ताकि सुबह जब सूरज उगे, तो रांची के हर मतदाता के चेहरे पर निडर मुस्कान हो और उंगली पर स्याही, गर्व के साथ चमके।
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