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Deoghar : सुबह की पहली किरणों के साथ देवघर की गलियों में हलचल थी। मंदिर के बाहर खड़े दुकानदार, फूल-माला सजाते पंडित और दूर-दराज से आए श्रद्धालु… सबकी नजरें एक ही ओर थीं। वजह थी देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी का आगमन। लेकिन यह दौरा सिर्फ एक VVIP विजिट नहीं था, बल्कि आस्था और विकास के बीच एक भावनात्मक सेतु भी बनता दिखा।
बाबा के दरबार में एक आम भक्त
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में जब गौतम अडानी पहुंचे, तो माहौल अचानक शांत हो गया। पूजा के वक्त न कारोबारी पहचान थी, न उद्योगपति का रुतबा… बस एक भक्त था, जो सिर झुकाकर भगवान शिव से प्रार्थना कर रहा था। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी यही कहा… “आज बाबा के दरबार में एक बड़ा आदमी नहीं, बल्कि एक आस्थावान इंसान आया है।”
पूजा से प्रोजेक्ट तक : आस्था के बाद जिम्मेदारी
बाबा के दर्शन के बाद हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती की ओर। यहां तस्वीर बिल्कुल अलग थी। मंदिर की घंटियों की जगह मशीनों की आवाज, और धुएं-धूल के बीच खड़े मजदूर जो अपने भविष्य की उम्मीदें इस प्रोजेक्ट से जोड़े बैठे हैं।
2400 मेगावाट की परियोजना, हजारों सपनों का सहारा
पीरपैंती में बन रहा 2,400 मेगावाट का कोयला आधारित सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट सिर्फ ईंट-सीमेंट की संरचना नहीं है। इसे तैयार कर रही Adani Power Limited की यह परियोजना करीब 21,400 करोड़ रुपये की लागत से आकार ले रही है। स्थानीय गांवों के युवाओं के लिए यह प्लांट रोजगार की उम्मीद है। किसी के लिए पहली नौकरी, तो किसी के लिए अपने बच्चों की पढ़ाई का सहारा। एक मजदूर ने कहा, “अगर प्लांट चालू हो गया, तो हमें काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।”

विकास का चेहरा
निरीक्षण के दौरान गौतम अडानी ने सिर्फ फाइलें नहीं देखीं, बल्कि अधिकारियों से यह भी पूछा कि स्थानीय लोगों को कितना फायदा मिल रहा है। स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य सुविधा… इन सब पर चर्चा हुई। यह साफ था कि विकास को जमीन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षा के साये में, उम्मीदों की रोशनी
VVIP मूवमेंट के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे, लेकिन इसके बीच लोगों की निगाहें सिर्फ बंदूक और वर्दी पर नहीं थीं। वे उस बदलाव को देख रहे थे, जो आने वाले समय में उनकी जिंदगी में दस्तक दे सकता है।
एक यात्रा, कई मायने
देवघर में आस्था, पीरपैंती में विकास… गौतम अडानी की यह एक दिन की यात्रा दो अलग दुनिया को जोड़ती नजर आई। एक ओर भगवान शिव के चरणों में प्रार्थना, तो दूसरी ओर बिजली, रोजगार और भविष्य की योजनाएं। शायद यही इस दौरे का असली मानवीय पहलू है—जहां श्रद्धा भी है और जिम्मेदारी भी, और उम्मीद है कि इन दोनों के मेल से हजारों जिंदगियों में रोशनी पहुंचेगी।
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