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Home » बिहार के खंडहरों में लौटेगी रौनक, पहाड़ों पर गूंजेगी तरक्की की गूंज… मंत्री का प्लान तैयार
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बिहार के खंडहरों में लौटेगी रौनक, पहाड़ों पर गूंजेगी तरक्की की गूंज… मंत्री का प्लान तैयार

July 3, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : कल्पना कीजिए कि आप बोधगया में महाबोधि मंदिर घूमकर निकल रहे हैं या राजगीर की वादियों में घूम रहे हैं, और अचानक आपकी नजर एक बेहद खूबसूरत, आधुनिक बाजार पर पड़ती है। वहां बिहार के किसी सुदूर गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किया गया शुद्ध शहद, हाथ से बनी बेहतरीन कलाकृतियां या खेतों से सीधा आया ऑर्गेनिक अनाज सलीके से सजा हुआ है। आप उसे खरीदते हैं और अपने साथ एक सुखद याद लेकर लौट जाते हैं।

बिहार के गांवों की इसी ताकत को अब एक नया और बड़ा आसमान मिलने जा रहा है। राज्य सरकार एक ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिससे गांव के हुनर को सीधे वैश्विक बाजार (ग्लोबल मार्केट) से जोड़ दिया जाए।

गांवों की तरक्की का नया रास्ता

इस पूरी मुहिम की नींव शुक्रवार को पटना में रखी गई, जहां ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने नाबार्ड और अपने विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक बेहद अहम बैठक की। बैठक का एजेंडा साफ था: गांवों के गरीब परिवारों की कमाई को कैसे बढ़ाया जाए और उन्हें कैसे आत्मनिर्भर बनाया जाए। मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि अब विकास की योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर गरीबों की जरूरतों को देखकर बननी चाहिए। इसी सोच के तहत तय हुआ कि बिहार के तमाम बड़े पर्यटन स्थलों पर अत्याधुनिक हाट-बाजार बनाए जाएंगे। जब देश-दुनिया के पर्यटक इन जगहों पर आएंगे, तो वे जीविका दीदियों और किसानों के शानदार उत्पादों को देख और खरीद सकेंगे। इससे गांवों में पैसा पहुंचेगा और वहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजबूत होगी।

खंडहर नहीं, अब रोजगार के केंद्र बनेंगे पुराने भवन

अक्सर गांवों में कई सरकारी भवन सालों से खाली और जर्जर पड़े रहते हैं। सरकार ने अब इनका कायाकल्प करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे जितने भी पुराने और खाली पड़े सरकारी भवन हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद उन्हें ढहाने या छोड़ने के बजाय एक बेहतरीन हाट और बाजार की शक्ल दे दी जाएगी। इतना ही नहीं, इस योजना को पूरी गंभीरता से लागू करने के लिए सरकार किसी पेशेवर एजेंसी की मदद से पायलट प्रोजेक्ट के तहत डीपीआर तैयार करवाएगी। साथ ही, गांवों के बच्चों के लिए खेल के मैदानों को भी एक व्यवस्थित तरीके से संवारा जाएगा।

हर पंचायत में हाईटेक हाट, मोबाइल पर बिकेगा सामान

बैठक में मौजूद ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने इस योजना को रफ्तार देते हुए एक बड़ा लक्ष्य तय कर दिया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अगले पांच साल के भीतर राज्य की हर एक ग्राम पंचायत में कम से कम एक आधुनिक हाट-बाजार बनकर तैयार हो जाना चाहिए।

डिजिटल होगी दीदियों की दुकान

यह हाट-बाजार सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं होंगे। प्रधान सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि इन सभी हाट को डिजिटल मार्केट यानी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि गांव की जीविका दीदी का उत्पाद सिर्फ उस बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति उसे अपने मोबाइल से ऑर्डर कर सकेगा। इसके लिए नाबार्ड से एक विस्तृत और मजबूत प्लान (PPT) मांगा गया है।

हुनरमंद बनेंगी महिलाएं, युवाओं को मिलेगा काम

योजना को टिकाऊ बनाने के लिए सबसे ज्यादा जोर ट्रेनिंग (कौशल विकास) पर है। प्रखंड स्तर पर कम से कम 10 महिलाओं और युवतियों का चयन करके उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। ये महिलाएं न सिर्फ इंटरनेशनल लेवल की क्वालिटी का सामान तैयार करेंगी, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं के लिए ट्रेनर की भूमिका भी निभाएंगी। इसके साथ ही, गांवों में प्लंबर की भारी कमी और मांग को देखते हुए जरूरतमंद युवाओं और जीविका दीदियों को प्लंबिंग की खास ट्रेनिंग दिलाने की योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही अच्छा रोजगार मिल सके।

पहाड़ी और आदिवासी इलाकों के लिए ‘बकरी पालन’ का सहारा

बिहार का एक हिस्सा पहाड़ी और आदिवासी बहुल भी है, जैसे पश्चिम चंपारण, मुंगेर और नवादा के कुछ इलाके। इन क्षेत्रों के लिए मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों को एक विशेष सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इन इलाकों के भूगोल को देखते हुए यहां बड़े पैमाने पर बकरी पालन को बढ़ावा दिया जाए। पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन करना आसान होता है और इसका सीधा आर्थिक लाभ वहां की गरीब महिलाओं को मिलेगा। इसके लिए लोगों को जागरूक करने और एक बेहतर प्रस्ताव तैयार करने का जिम्मा अधिकारियों को सौंपा गया है।

इस पूरी बैठक में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, मनरेगा आयुक्त अनन्या सिंह और नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह जैसे कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जो अब इस बड़ी योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में जुट गए हैं।

इसे भी पढ़ें : बिहार के शहरी भविष्य का सबसे बड़ा ब्लूप्रिंट लेकर आए सीएम सम्राट

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