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Ranchi : अमृतसर की सरहदी हवाओं में कुछ तो बात है, जो यहां आने वाले हर मेहमान को अपनेपन का एहसास कराती है। 3 से 6 दिसंबर तक चले ISGCON 2025 सम्मेलन में यही एहसास डॉक्टरों और विशेषज्ञों को बार-बार महसूस हुआ। देशभर से आए चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच रांची के मशहूर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जयंत घोष का अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा, जो सिर्फ एक वैज्ञानिक सम्मेलन तक सीमित नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाली यात्रा बन गया।

“सीख, स्नेह और स्वाद… अमृतसर ने हर स्तर पर समृद्ध किया”
अमृतसर पहुंचते ही डॉ. घोष का स्वागत जिस गर्मजोशी से हुआ, वह उनके पूरे सफर की सबसे मजबूत यादों में शामिल हो गया। वे बताते हैं,
“सम्मेलन में तो ज्ञान मिला ही, लेकिन अमृतसर ने दिल जीत लिया। लोगों की मुस्कान में अपनापन और मेहमानों के लिए सम्मान साफ झलकता था।” अमृतसर के दर्शनीय स्थलों स्वर्ण मंदिर का शांत वातावरण, वाघा बॉर्डर का जोश और पुरानी गलियों की रौनक, इन सबने उनके अनुभव में मानवीय भावनाओं की नई परत जोड़ दी।

स्वाद जिसने यादों को और गहरा किया
गुरुद्वारा लंगर से लेकर अमृतसर की मशहूर कुलचा-चने और बेहतरीन लस्सी तक, हर स्वाद में शहर की आत्मा बसती है। डॉ. जयंत घोष कहते हैं,“यहां का भोजन सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति की कहानी कहता है।”

फैकल्टी सदस्य के तौर पर नवाजे गए डॉ घोष
ISGCON 2025 में डॉ. जयंत घोष को फैकल्टी सदस्य के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह उनके अनुभव का सबसे गौरवपूर्ण क्षण बना। उन्होंने अपने शोध और ज्ञान को देशभर के युवा डॉक्टरों व विशेषज्ञों के साथ साझा किया। उनके लिए यह अवसर सिर्फ एक पेशेवर उपलब्धि नहीं था, बल्कि उन मरीजों के प्रति जिम्मेदारी को भी मजबूत करने वाला क्षण था जिनकी सेवा वे रोज करते हैं।

“समिति ने सिर्फ आयोजन नहीं किया, परिवार जैसा साथ दिया”
डॉ. जयंत घोष आयोजन समिति का धन्यवाद करते हुए कहते हैं कि ISGCON 2025 की सफलता केवल वैज्ञानिक सत्रों में नहीं थी, बल्कि उस मानवीय जुड़ाव में थी जो हर प्रतिभागी ने महसूस किया। अंत में वे कहते हैं… “अमृतसर से मैं सिर्फ ज्ञान लेकर नहीं लौटा हूं, बल्कि लोगों की गर्मजोशी और दिल छू लेने वाली यादें साथ लेकर जा रहा हूं।”

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