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पान का पत्ता एक विशेष लता का पत्ता है. इसका प्रयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है. यह पाचन तंत्र को अच्छा और शरीर को विषमुक्त करता है. भारत में इसे प्राचीनकाल से काफी पवित्र माना जाता है. यहां तक की इसका उल्लेख वेदों में भी किया गया है. लगभग हर तरह के पूजा अनुष्ठान में इसका प्रयोग होता है. इसको शुभ कार्य की शुरुआत के लिये भी प्रयोग करते हैं. देवी की उपासना में पान के पत्ते से विशेष मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं.
पान का पत्ता पूरा होना चाहिए और इसमें डंठल लगी होनी चाहिए. पान का पत्ता कहीं से भी कटा-फटा न हो. पूजा और प्रयोग के लिए हरे पान का पत्ता ही प्रयोग करें.
सिन्दूर को घी में मिलाकर पेस्ट बना लें. पान के पत्ते पर चिकनी तरह इस पेस्ट से अपना नाम लिखें. इसको चिकनी तरफ से ही देवी को अर्पित करें. ये प्रयोग नवरात्रि में लगातार तीन दिन करें.
नवरात्रि में रोज शाम को मां लक्ष्मी की कपूर से आरती करें. इसके बाद पान के पत्ते पर गुलाब की पंखुड़ियां रखकर उन्हें अर्पित करें. नवरात्रि के बाद ये प्रयोग हर पूर्णिमा की रात्रि को करते रहें.

