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Home » खुशखबरी: Pfizer की वैक्सिन 65 साल से उपर के लोगों पर भी 95 प्रतिशत असरदार
हेल्थकेयर

खुशखबरी: Pfizer की वैक्सिन 65 साल से उपर के लोगों पर भी 95 प्रतिशत असरदार

November 18, 2020No Comments5 Mins Read
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अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

कोरोना वायरस की घातक महामारी से लोगों को बचाने के लिए वैक्सीन की खोज में जुटी फार्मा कंपनी Pfizer Inc को बेहद उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। कंपनी ने कहा है कि उसकी बनाई वैक्सीन 95% तक असरदार है। इसके साथ ही कंपनी अमेरिका में सबसे पहले FDA की इजाजत के लिए आवेदन देने के लिए कुछ ही दिन में तैयार हो जाएगी।

Pfizer की mRNA आधारित वैक्सीन BNT162b2 के क्लिनिकल ट्रायल के फाइनल अनैलेसिस के डेटा में यह सफलता मिली है। अमेरिकी कंपनी और पार्टनर BioNTech SE ने कहा है कि उनकी वैक्सीन से सभी उम्र और समुदाय के लोगों को सुरक्षा मिली है। इसकी सुरक्षा को लेकर भी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है। इसके साथ ही, अमेरिका के FDA (फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन) से इमर्जेंसी में इस्तेमाल की इजाजत (EUA) हासिल करने के लिए मानक को पार कर लिया गया है।

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दरअसल, वैक्सीन को युवा और स्वस्थ्य लोगों पर टेस्ट किया गया था और ऐसे में बुजुर्गों पर इसका क्या असर होगा, यह अभी देखना होगा। वहीं, साहिन का कहना है कि वैक्सीन का पूरा डेटा तीन हफ्ते में आ सकता है। उन्होंने कहा कि यह कोविड-19 को रोक सकेगी लेकिन क्या यह ट्रांसमिशन को रोक सकेगी या नहीं, इसका जवाब अभी नहीं मिला है। साहिन ने कहा कि वैक्सीन एक साल के लिए सुरक्षा देगी और हर साल एक बूस्टर की जरूरत पड़ सकती है।

ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और AstraZeneca के वैक्सीन ट्रायल के लीडर प्रफेसर ऐंड्रू पोलार्ड का कहना है कि टीम को उम्मीद है कि क्रिसमस तक वैक्सीन को मंजूरी मिल जाएगी। उनका कहना है कि यह Pfizer से 10 गुना सस्ती होगी। दरअसल, Pfizer की वैक्सीन को -70 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखना होगा और कुछ हफ्ते के अंतर पर दो इंजेक्शन लगाने होंगे। ऑक्सफर्ड की वैक्सीन को फ्रिज के तापमान पर रखना होगा।

अमेरिका की Moderna Inc ने हाल ही में कहा है कि उसकी mRNA वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के शुरुआती डेटा को मॉनिटरिंग बोर्ड को सबमिट करने की तैयारी की जा रही है। इससे उम्मीदें पैदा हुई हैं कि जल्द ही शुरुआती नतीजे जारी भी कर दिए जाएंगे। पहले अंतरिम अनैलेसिस में 53 मामलों को शामिल किए जाने की संभावना है। Moderna ने अपने आखिरी चरण के ट्रायल जुलाई में शुरू किए थे और कंपनी अपने टार्गेट से पीछे चल रही है। दरअसल, इसकी दो खुराकें चार हफ्तों के अंतर पर दी जाती हैं।

वैक्सीन का ट्रायल 44 हजार लोगों पर किया गया था। डेटा में पाया गया कि 170 वॉलंटिअर्स को कोविड-19 हुआ जिनमें से 8 लोग ऐसे थे जिन्हें वैक्सीन दी गई थी और 162 को प्लसीबो। वैक्सीन ने बीमारी की गंभीरता को कम किया जबकि प्लीबो समूह के 10 में से 9 लोगों को गंभीर बीमारी हुई। डेटा में बताया गया है कि 65 साल की उम्र से ज्यादा के लोगों पर वैक्सीन 94% से ज्यादा असरदार पाई गई।

अभी तक के आकलन के आधार पर माना जा रहा है कि विश्वभर में वैक्सीन की 5 करोड़ खुराकें 2020 में बनाई जा सकती हैं और अगले साल के आखिर तक 1.3 अरब खुराकें तैयार की जा सकती हैं। Pfizer के चेयरमैन और CEO डॉ. अल्बर्ट बौरला का कहना है, ‘स्टडी के नतीजों से इस महामारी को खत्म करने के लिए वैक्सीन खोजने के 8 महीने के ऐतिहासिक सफर में अहम पड़ाव पर पहुंचे हैं। हमने विज्ञान की रफ्तार पर आगे बढ़ना जारी रखा है और अभी तक मिला डेटा इकट्ठा कर रहे हैं और दुनियाभर के रेग्युलेटर्स से शेयर कर रहे हैं।’

वैज्ञानिकों ने अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स की तरफ से विकसित किए जा रहे संभावित टीके को भारत के लिए सबसे उपयुक्त बताते हुए कहा कि कोविड-19 का सही टीका खरीदने का फैसला कई कारकों पर निर्भर करेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि टीका कितना सुरक्षित है, उसकी कीमत क्या है और उसे इस्तेमाल करना कितना सुविधाजनक है।

इन तीनों में से कोई भी प्रोटीन आधारित नहीं है, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के लिए संभवत: अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना सबसे उपयुक्त है, क्योंकि इसके लिए अन्य संभावित टीकों की अपेक्षा उतने कम तापमान की जरूरत नहीं है। वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि मॉडर्ना के टीके को 30 दिन तक फ्रिज में रखा जा सकता है और कमरे के तापमान में 12 घंटे तक रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और दुनिया के कई अन्य ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मियों में तापमान बहुत अधिक रहता है और जिन टीकों के भंडारण के लिए बेहद कम तापमान आवश्यक है, वे गर्म स्थानों पर उपयोगी नहीं हो पाएंगे।

बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर राघवन वरदराजन ने भी कहा कि फाइजर भारत में व्यापक स्तर पर प्रयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने भी कहा कि नोवावैक्स का प्रोटीन आधारित टीका अब तक सबसे उपयुक्त प्रतीत हो रहा है, लेकिन कई अन्य कारक भी मायने रखते हैं जैसे कि टीका कब तैयार हो पाता है और उसकी कीमत क्या होती है।

जिन लोगों को वैक्सीन दी गई थी उनमें इसका अच्छा असर देखा गया और खास साइड इफेक्ट नहीं हुए। ज्यादा थकान की समस्या 3.7% वॉलंटिअर्स में दूसरी खुराक के बाद देखी गई लेकिन 2% से ज्यादा लोगों में सिर्फ यही एक गंभीर परेशानी देखी गई थी। Pfizer ने कहा है कि स्टडी की डेटा मॉनिटरिंग कमिटी ने अभी तक वैक्सीन के किसी गंभीर साइड इफेक्ट के बारे में नहीं बताया है। कुछ उम्रदराज लोगों में वैक्सिनेशन के बाद कुछ साइड इफेक्ट्स देखे गए।

इसे विकसित करने वाली टीम के अरबपति लीड साइंटिस्ट उगूर साहिन का दावा है कि वैक्सीन वायरस पर कड़ा प्रहार करेगी और महामारी को खत्म कर देगी। साहिन का कहना है कि वैक्सीन का पूरा डेटा तीन हफ्ते में आ सकता है। उन्होंने कहा कि यह कोविड-19 को रोक सकेगी लेकिन क्या यह ट्रांसमिशन को रोक सकेगी या नहीं, इसका जवाब अभी नहीं मिला है। साहिन ने कहा कि वैक्सीन एक साल के लिए सुरक्षा देगी और हर साल एक बूस्टर की जरूरत पड़ सकती है।

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