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Home » कम उम्र में खराब हो रहे कूल्हे, जानिए क्यों बढ़ रहा हिप रिप्लेसमेंट का खतरा
हेल्थकेयर

कम उम्र में खराब हो रहे कूल्हे, जानिए क्यों बढ़ रहा हिप रिप्लेसमेंट का खतरा

June 16, 2026No Comments5 Mins Read
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News Samvad : एक समय था जब हिप रिप्लेसमेंट को बढ़ती उम्र से जुड़ी सर्जरी माना जाता था। आमतौर पर यह समस्या 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है। अब 30 से 50 वर्ष के बीच के लोगों में भी हिप रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और कोविड के दौरान स्टेरॉयड के अधिक इस्तेमाल ने इस खतरे को बढ़ाया है।

क्या होता है हिप रिप्लेसमेंट?

हिप रिप्लेसमेंट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें कूल्हे के खराब या घिस चुके जोड़ को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम जोड़ लगाया जाता है। जब जोड़ के बीच मौजूद कार्टिलेज घिस जाता है, तब हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। इसके कारण चलने, बैठने, सीढ़ियां चढ़ने या उठने-बैठने में तेज दर्द और जकड़न महसूस होती है।यह स्थिति गंभीर गठिया, चोट, फ्रैक्चर या लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द के कारण पैदा हो सकती है। जब दवाइयों और अन्य उपचारों से राहत नहीं मिलती, तब हिप रिप्लेसमेंट की सलाह दी जाती है।

युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, आज की जीवनशैली इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता वजन कूल्हों के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।इसके अलावा कई युवा बिना सही प्रशिक्षण के भारी वर्कआउट करते हैं। गलत तकनीक से रनिंग, जंपिंग या वेट लिफ्टिंग करने पर हिप जॉइंट्स को नुकसान पहुंच सकता है। बार-बार लगने वाली छोटी चोटें भी आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकती हैं।

कोविड के बाद क्यों बढ़े मामले?

सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कौशल कांत मिश्रा के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद कम उम्र के मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।उन्होंने बताया कि कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान कई मामलों में स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया गया। स्टेरॉयड के अधिक उपयोग से कूल्हे की हड्डी तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति को एवैस्कुलर नेक्रोसिस कहा जाता है।इस बीमारी में हड्डी को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता, जिससे वह धीरे-धीरे कमजोर और क्षतिग्रस्त होने लगती है। समय रहते इलाज न होने पर यह स्थिति हिप आर्थराइटिस और बाद में हिप रिप्लेसमेंट की वजह बन सकती है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?

कुछ लोगों में हिप जॉइंट से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक होता है। इनमें शामिल हैं:

  • अधिक वजन या मोटापे से पीड़ित लोग
  • लंबे समय तक बैठे रहने वाले कर्मचारी
  • हाई-इम्पैक्ट स्पोर्ट्स खेलने वाले खिलाड़ी
  • भारी वेट ट्रेनिंग करने वाले लोग
  • स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करने वाले मरीज
  • हिप में पुरानी चोट या फ्रैक्चर झेल चुके लोग

खेल और वर्कआउट के दौरान बरतें ये सावधानियां

यदि आप नियमित रूप से खेलकूद या जिम करते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

वॉर्म-अप को नजरअंदाज न करें

किसी भी खेल या वर्कआउट से पहले कम से कम 10 मिनट तक वॉर्म-अप करें। इससे मांसपेशियां और जोड़ गतिविधि के लिए तैयार हो जाते हैं।

सही जूते पहनें

खेल या दौड़ के दौरान अच्छे गुणवत्ता वाले स्पोर्ट्स शूज का इस्तेमाल करें। गलत जूते जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

पॉश्चर पर रखें ध्यान

रनिंग, जंपिंग और वेट लिफ्टिंग करते समय शरीर की मुद्रा सही होना बेहद जरूरी है। गलत पॉश्चर चोट और जोड़ों के घिसाव का कारण बन सकता है।

क्षमता से ज्यादा दबाव न डालें

फिटनेस जरूरी है, लेकिन शरीर की सीमा को समझना भी उतना ही जरूरी है। लगातार दर्द होने पर वर्कआउट की तीव्रता कम करें और विशेषज्ञ से सलाह लें।

स्ट्रेचिंग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं

हैमस्ट्रिंग, क्वाड्स और हिप मसल्स की नियमित स्ट्रेचिंग से जोड़ों का लचीलापन बना रहता है और चोट का खतरा कम होता है।

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैसी हो डाइट?

हिप और अन्य जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है।

कैल्शियम से भरपूर भोजन खाएं

दूध, दही, पनीर और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। रागी भी कैल्शियम से भरपूर पारंपरिक खाद्य पदार्थ माना जाता है।

विटामिन डी की कमी न होने दें

सुबह की हल्की धूप विटामिन डी का प्राकृतिक स्रोत है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरूरी होता है।

प्रोटीन और ओमेगा-3 लें

हड्डियों और मांसपेशियों की मरम्मत के लिए पर्याप्त प्रोटीन जरूरी है। ओमेगा-3 फैटी एसिड सूजन कम करने में भी मदद करता है।

पर्याप्त पानी पिएं

शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा जोड़ों की चिकनाई बनाए रखने में मदद करती है। इससे घर्षण कम होता है और जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर रहती है।

सक्रिय जीवनशैली है सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि हिप रिप्लेसमेंट की बढ़ती समस्या से बचने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि सबसे प्रभावी उपाय है। साइक्लिंग, जॉगिंग, तेज चाल से चलना और हल्का व्यायाम जोड़ों में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाते हैं। साथ ही वजन नियंत्रित रखने से कूल्हों और घुटनों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होता है।यदि हिप में लगातार दर्द, जकड़न या चलने-फिरने में परेशानी महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उपचार भविष्य में बड़ी सर्जरी की जरूरत को टाल सकता है।

डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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