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Dhanbad : धनबाद रिंग रोड निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण में हुए मुआवजा घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी की टीम ने धनबाद समेत कई अन्य इलाकों में छापेमारी कर 16 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।
भू-राजस्व विभाग के अधिकारी और बिचौलिए शामिल
गिरफ्तार किए गए लोगों में भू-राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और कई बिचौलियों के नाम सामने आए हैं। एसीबी की शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।
जमीन मालिकों के नाम पर निकाली गई रकम
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने रिंग रोड निर्माण के लिए रैयतों की जमीन अधिग्रहित की थी। नियमानुसार जमीन मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाना था, लेकिन फर्जी दस्तावेज और गलत रिकॉर्ड तैयार कर मुआवजे की बड़ी रकम निकाल ली गई।
फर्जी दस्तावेज और गलत रिकॉर्ड का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। कई मामलों में ऐसे लोगों के नाम पर मुआवजा उठा लिया गया, जिनका जमीन से कोई संबंध नहीं था। इस पूरे खेल में बिचौलियों की अहम भूमिका बताई जा रही है।
करीब 300 करोड़ रुपये का बताया जा रहा घोटाला
एसीबी सूत्रों के अनुसार इस घोटाले की अनुमानित राशि करीब 300 करोड़ रुपये है। जांच एजेंसी को आशंका है कि आगे की जांच में घोटाले की रकम और भी बढ़ सकती है।
साल 2014 से चल रही है जांच
यह मामला पहली बार वर्ष 2014 में सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने पहले निगरानी ब्यूरो और फिर एसीबी को इसकी जांच सौंपी थी। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
आगे और गिरफ्तारियों की संभावना
एसीबी की कार्रवाई अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दायरे में और भी नाम सामने आ सकते हैं और आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।
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