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Hazaribagh : हजारीबाग के बड़कागांव के पंडौल गांव की गलियों में सुबह से ही हलचल थी। किसी के हाथ में पुरानी पर्ची थी, तो कोई अपने बच्चे को गोद में लेकर डॉक्टर के इंतजार में बैठा था। किसी को कमजोरी की शिकायत थी, तो किसी की कमर और हड्डियों का दर्द महीनों से पीछा नहीं छोड़ रहा था। गांव के कई लोग ऐसे थे, जो इलाज की उम्मीद लेकर तो निकलते हैं, लेकिन अस्पताल की दूरी और खर्च उन्हें बार-बार रोक देता है। ऐसे में जब अदाणी फाउंडेशन की ओर से पंडौल इलाके में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, तो गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल कैंप नहीं था, बल्कि राहत का एक मौका था।
सुबह से जुटने लगे लोग, किसी को दवा की उम्मीद तो किसी को जांच की
गोंदुलपारा खनन परियोजना के तहत आयोजित इस शिविर में जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, वैसे-वैसे ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती चली गई। कई बुजुर्ग लाठी के सहारे पहुंचे, कुछ महिलाएं अपने घर के काम जल्दी निपटाकर लाइन में आकर बैठ गईं। ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी यही थी कि छोटे-छोटे इलाज के लिए भी उन्हें बड़कागांव या हजारीबाग शहर तक जाना पड़ता है। आने-जाने का खर्च, समय की कमी और मजदूरी छूटने का डर उन्हें इलाज से दूर कर देता है।

डॉक्टरों ने किया इलाज, बीपी जांच से लेकर जरूरी सलाह तक मिली
शिविर में डॉक्टर सुधांशु शेखर और उनकी अनुभवी मेडिकल टीम ने ग्रामीणों की जांच की। इस दौरान कुल 23 मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें 16 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल रहीं। जांच के दौरान अधिकतर लोगों में कमजोरी, अनियमित ब्लड प्रेशर, हड्डियों में दर्द और मौसमी बीमारी जैसी समस्याएं पाई गईं। डॉक्टरों ने मरीजों का बीपी मापा और उन्हें दवाओं के साथ-साथ खान-पान को लेकर भी जरूरी सलाह दी। डॉक्टरों ने ग्रामीणों को समझाया कि बदलते मौसम में साफ पानी पीना, हाथ धोने की आदत और खानपान पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है। कई लोगों को यह भी बताया गया कि समय पर इलाज न कराने से सामान्य बीमारी भी गंभीर रूप ले सकती है।
“अब शहर नहीं जाना पड़ेगा”, यह बात सुनकर खुश दिखे ग्रामीण
शिविर की सबसे खास बात यह रही कि परामर्श के बाद जरूरत के अनुसार मुफ्त दवाएं भी दी गईं। यह सुविधा ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि “बीपी की दवा खत्म हो गई थी, लेकिन शहर जाने के पैसे नहीं थे। आज डॉक्टर ने जांच भी कर दी और दवा भी मिल गई। अब कुछ दिनों तक आराम रहेगा।” वहीं, एक महिला ने कहा कि “कमजोरी बहुत रहती है, घर के काम में भी दिक्कत होती है। डॉक्टर ने बताया कि क्या खाना चाहिए और दवा भी दी। ऐसे शिविर बार-बार लगना चाहिए।”
शिविर सिर्फ इलाज नहीं, भरोसा भी लेकर आया
पंडौल में लगा यह शिविर केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं रहा। यह उन ग्रामीणों के लिए भरोसे की तरह था, जिन्हें अक्सर लगता है कि अच्छे इलाज की सुविधा सिर्फ शहरों में ही मिलती है। शिविर में मौजूद लोगों के चेहरे पर राहत साफ दिख रही थी। किसी को डॉक्टर से पहली बार खुलकर बात करने का मौका मिला, तो किसी ने पहली बार जाना कि नियमित जांच क्यों जरूरी है।
शिक्षा, रोजगार और खेती में भी सक्रिय है अदाणी फाउंडेशन
अदाणी फाउंडेशन की ओर से बड़कागांव प्रखंड में स्वास्थ्य के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी काम किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने और जल संरक्षण जैसे प्रयासों से किसानों को भी फायदा मिल रहा है।
ग्रामीणों ने की मांग, नियमित रूप से लगे ऐसे शिविर
शिविर खत्म होने के बाद भी कई लोग यह पूछते नजर आए कि अगला शिविर कब लगेगा। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में डॉक्टरों की मौजूदगी उन्हें समय पर इलाज की दिशा में प्रेरित करती है। लोगों ने अदाणी फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अगर ऐसे शिविर नियमित रूप से लगते रहें, तो गांव के कई लोगों को बड़ी बीमारियों से पहले ही बचाया जा सकता है।
एक दिन का शिविर, लेकिन असर लंबे समय का
पंडौल में आयोजित यह नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर ग्रामीणों के लिए एक दिन का आयोजन जरूर था, लेकिन इसकी अहमियत कई महीनों तक महसूस की जाएगी। जिन लोगों के लिए इलाज का मतलब सिर्फ शहर की दौड़ और खर्च था, उनके लिए यह शिविर राहत की सांस बनकर आया।
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