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Dhanbad : धनबाद की एक शांत दोपहर। पहला कदम स्कूल के खुले आंगन में बच्चे अपने-अपने तरीके से खिलखिला रहे थे। कुछ व्हीलचेयर पर थे, कुछ बैसाखी के सहारे खड़े थे, और कुछ शिक्षक का हाथ पकड़ कर छोटे-छोटे कदम आगे बढ़ा रहे थे। उनके चेहरों पर वही चमक थी जो किसी सामान्य बच्चे में होती है, बस जरूरत थोड़ी सी ज्यादा मदद और भरोसे की होती है।
इसी माहौल में एक नया उत्साह फैल गया, जब स्कूल में गौतम अदाणी पहुंचे।
बच्चों की आंखों में उम्मीद की चमक
अदाणी जब बच्चों के बीच पहुंचे तो कई बच्चे शर्माते हुए उनके पास आए। कुछ ने हाथ पकड़कर अपनी छोटी-छोटी कहानियां सुनाईं। किसी ने बताया कि उसे बिस्किट बनाना आता है, किसी ने खुशी से कहा कि वह दौड़ने की प्रैक्टिस कर रहा है। अदाणी हर बात को ध्यान से सुनते रहे, मानो वे सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि कोई अपना हो जिससे बच्चे खुलकर बात कर सकें। उनके आने से माहौल में एक सरल सा बदलाव दिखा, बच्चों के बीच अपनापन का भाव था और शिक्षकों में उम्मीद की नई सांस।

नई उड़ान कैफे : सपनों को पंख देने की जगह
इस दौरे का सबसे खास पल था “नई उड़ान कैफे” का उद्घाटन। यह कैफे सिर्फ चाय-कॉफी बेचने की जगह नहीं है। यह उन हाथों का भविष्य है, जो थोड़ी ट्रेनिंग पाकर खुद को साबित करना चाहते हैं। यहां बच्चे सीखेंगे कि खाना कैसे बनता है, सर्विंग कैसे की जाती है, और एक छोटे से कैफे को कैसे चलाया जाता है। उन्हें बताया जाएगा कि मेहनत और कौशल मिलकर कैसे किसी की जिंदगी बदल सकते हैं। एक शिक्षक ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि ये बच्चे किसी पर बोझ न बनें, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर दुनिया को दिखाएं कि उनके पास भी हुनर है।”

बच्चों का संघर्ष और जीत
पहला कदम स्कूल के कई बच्चे उन परिवारों से आते हैं, जहां रोज की जरूरतें पूरी करना ही संघर्ष होता है। ऐसे में शिक्षा और विशेष देखभाल की उम्मीद बहुत दूर की बात होती है। लेकिन यह स्कूल उन बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद का दरवाजा बन गया है। यहां सिर्फ क्लास नहीं चलती। यहां फिजियोथेरेपी होती है, स्पीच थेरेपी दी जाती है, कला और खेल सिखाया जाता है, और हर बच्चे को ध्यान से समझा जाता है। इनमें से कई बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर para sports में झारखंड का नाम रोशन कर चुके हैं। जीत चाहे कितनी भी छोटी हो, हर सफलता उनके लिए जीवन का नया कदम बनती है।

अदाणी का वादा : सिर्फ सहयोग नहीं, एक संबंध
कार्यक्रम में अदाणी ने कहा कि समाज का हर बच्चा बराबर है और हर किसी को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने अगले तीन साल तक संस्थान को लगातार सहयोग देने का संकल्प लिया। उनके शब्दों में एक औपचारिकता कम और एक अपनापन ज्यादा था। ऐसा लगा कि वे सिर्फ मदद करने नहीं आए, बल्कि एक रिश्ता बनाने आए हैं।

सम्मान की नई राह
पहला कदम स्कूल और नारायणी ट्रस्ट को पहले भी कई बार सम्मान मिल चुका है, लेकिन बच्चों के चेहरे पर जो खुशी थी, वह किसी भी पुरस्कार से बड़ी थी। जब बच्चे ताली बजाकर “नई उड़ान कैफे” का स्वागत कर रहे थे, तब उनके चेहरे पर वही चमक दिख रही थी, जो किसी बड़े सपने को सच होते हुए देखती है।
एक नई शुरुआत
अदाणी की यात्रा ने इस स्कूल में नई ऊर्जा भर दी है। यह सिर्फ आर्थिक सहायता की बात नहीं है, बल्कि इस बात का एहसास है कि समाज का एक बड़ा वर्ग इन बच्चों को लेकर गंभीर है। इस दौरे ने यह संदेश दिया कि दिव्यांगता क्षमता को खत्म नहीं करती। जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन, सही माहौल और थोड़े से भरोसे की होती है।

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