अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह की हल्की ठंड के बीच समाहरणालय के दफ्तर में आज कुछ अलग ही माहौल था। कुर्सी पर बैठे बुजुर्ग हों या हाथ में कागजों की फाइल थामे युवा, हर किसी की नजर बस एक ही दिशा में टिकी थी। सभी को उम्मीद थी कि आज उनकी बात सीधे डीसी मनीष कुमार तक पहुंचेगी और लंबे समय से अटकी परेशानी का शायद कोई हल निकलेगा।
एक बुजुर्ग की उम्मीद भरी आवाज
दरबार की शुरुआत में ही एक बुजुर्ग सामने आए। थके कदमों से चलकर उन्होंने अपनी जमीन के विवाद से जुड़ी बात रखी। बोलते वक्त उनकी आवाज में कई सालों की बेचैनी साफ झलक रही थी। डीसी ने ध्यान से सुना और तुरंत संबंधित अधिकारी को बुलाकर जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा। बुजुर्ग के चेहरे पर फैली राहत शायद आज के दरबार की सबसे बड़ी तस्वीर थी।
युवा की बिजली समस्या से जुड़ी कहानी
एक किनारे खड़ा एक युवक धीरे-धीरे आगे आया। उसने बताया कि गांव में महीनों से बिजली की अनियमितता के कारण पढ़ाई और काम दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उसकी बात खत्म होते ही डीसी ने बिजली विभाग को मौके पर जांच करने का निर्देश दिया। युवक की आंखों में साफ दिख रहा था कि उसे उम्मीद फिर से मिल गई है।
महिला की शिक्षा से जुड़ी चिंता
दरबार में आई एक महिला ने बच्चों की स्कूल से जुड़ी दिक्कतें बताईं। उसकी बात सुनकर डीसी ने शिक्षा विभाग को मामले की जांच के लिए नोट किया और कहा कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों को साफ निर्देश
शिकायतें सुनने के बाद उपायुक्त ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि हर आवेदन की जमीन पर जाकर जांच की जाए और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट उनके कार्यालय में सौंपी जाए। उन्होंने साफ कहा कि लोगों की परेशानी को फाइलों तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा।
उम्मीद की छतरी
आज का जनता दरबार सिर्फ शिकायतें सुनने का मंच नहीं था। यह उन लोगों के लिए एक उम्मीद की जगह था, जो महीनों से दफ्तरों के चक्कर काटते रहे। डीसी मनीष कुमार की तरफ से मिला आश्वासन यह बता रहा था कि प्रशासन और लोगों के बीच की दूरी कम करने की कोशिशें जारी हैं।
इसे भी पढ़ें : दोस्ती से प्लानिंग तक हुई जेल में, बाहर निकल ताबड़तोड़ किया कांड

