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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सुबह की धूप जब ब्लू प्लैनेट पब्लिक स्कूल के हरे-भरे मैदान पर पड़ रही थी, तब वहां पहले ही से जीवन के अनुभवों और यादों की गंध महसूस हो रही थी। रविवार को यहां पूर्व सैनिकों का होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। हर चेहरा अपने अनुभवों की कहानी कह रहा था, हर हाथ में गुलाल और हृदय में देशभक्ति की भावना।
एक मंच, हजारों यादें
समारोह की शुरुआत आपसी अभिनंदन से हुई। पूर्व सैनिकों ने एक-दूसरे को गले लगाया, अबीर-गुलाल लगाया और शुभकामनाओं का दौर चल। लेकिन इन रंगों के पीछे छुपा था स्नेह, सम्मान और वर्षों की दोस्ती का एहसास। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सचिव राम टहल महतो ने कहा, “यह केवल होली नहीं है, यह उन यादों का उत्सव है जो हमने देश की सेवा में बिताई हैं। यहां हर मुस्कान और हर गले मिलने में समानुभूति और अपनापन झलकता है।”
रंगों में घुली भावनाएं
जैसे ही ढोलक की थाप और होली के गीतों की मधुर धुन गूंजने लगी, पूर्व सैनिकों के चेहरे खिल उठे। कुछ झूमते रहे, कुछ अपने साथी के साथ पुराने अनुभव साझा करते रहे। विजय सिंह ने कहा, “सीमा पर बिताए वो दिन आज भी आंखों के सामने हैं। यहां आकर पुराने साथियों से मिलना और होली खेलना, हमें एक परिवार की तरह जोड़ देता है।” गुलाल उड़ता रहा, हंसी गूंजती रही और पुराने किस्से, कभी मजाकिया तो कभी भावुक, हर कोने में सुनाई दे रहे थे।

गीत-संगीत में बुनी देशभक्ति
सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले गीतों में सिर्फ होली के रंग ही नहीं, बल्कि देशभक्ति की मिठास भी घुली हुई थी। पूर्व सैनिकों ने मंच पर आकर “रंग बरसे” और लोकधुनों पर अपने अनुभवों के साथ गीत गाए। कई ने सेना में बिताए कठिन पलों और साथियों की यादों को गीतों के माध्यम से साझा किया। मनोज यादव ने मंच से कहा, “हमारे अनुभव यहां मौजूद युवाओं को भी यह समझाने का माध्यम हैं कि देश सेवा में संघर्ष भी सुंदर होता है।”
भाईचारा और सामाजिक प्रतिबद्धता
समारोह में उपस्थित पूर्व सैनिकों ने इस बात पर जोर दिया कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम, एकता और भाईचारे को मजबूत करने का त्योहार है। इस मंच ने उन्हें आपसी जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाई। यहां मौजूद विजय सिंह, धर्मचंद प्रसाद, अमित कुमार साहू, चतुर्भुज कश्यप, आर. पी. सिंह, विवेक विश्वकर्मा और अन्यविजय सिंह, धर्मचंद प्रसाद, अमित कुमार साहू, चतुर्भुज कश्यप, आर. पी. सिंह, विवेक विश्वकर्मा, अमन कुमार मिश्रा, मनोज यादव, शिव शंकर यादव, शत्रुघ्न प्रसाद, ललन सिंह, छोटन सिंह, रवि कुमार सिंह, गोपाल यादव, भुवनेश्वर महतो, दशरथ विश्वकर्मा, अजय तिवारी, एच. एन. यादव, इंद्रनाथ महतो, विनोद सिंह, अरविंद सिंह और नागेश्वर राम सहित अन्य सभी ने यह महसूस किया कि रंगों से बढ़कर यादें और रिश्ते महत्वपूर्ण हैं।
सामूहिक शुभकामनाओं के साथ समापन
समापन के समय, सभी ने हाथ जोड़कर राष्ट्र की एकता, अखंडता और शांति के लिए सामूहिक शुभकामनाएं दीं। समारोह खत्म हुआ, लेकिन स्मृतियों और रंगों की गर्माहट हर किसी के दिल में बस गई। एक पूर्व सैनिक ने मुस्कुराते हुए कहा, “होली का असली मज़ा यही है… पुराने साथियों के संग बिताए पलों को याद करना और भविष्य के लिए प्रेरणा लेना।” ब्लू प्लैनेट स्कूल का यह मैदान आज सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि भावनाओं, यादों और भाईचारे के रंगों से भी रंग गया।
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