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Ranchi : क्या रोबोट या कंप्यूटर स्क्रीन पर दौड़ते कुछ कोड्स एक दिन इंसान की जगह ले लेंगे? क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आने वाले दिनों में दफ्तरों से इंसानी संवेदना और सोच को बेदखल कर देगा? अगर आपके मन में भी यह डर या सवाल कौंधता है, तो गुरुवार को रांची के माहौल में इस सवाल का बड़ा ही खूबसूरत जवाब तैर रहा था। मौका था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (NIPM) रांची चैप्टर की एक खास चर्चा का, जहां शहर के दिग्गज कॉर्पोरेट लीडर्स और एचआर एक्सपर्ट्स एक छत के नीचे जमा हुए थे। CCL मुख्यालय के प्रकाश हॉल में जब “इंटीग्रेटिंग एआई विद एचआई.” (कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय समझ का समन्वय) विषय पर बात शुरू हुई, तो एक बात बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो गई… तकनीक कितनी भी स्मार्ट हो जाए, पर दिल और दिमाग का असली कॉम्बिनेशन तो इंसान के पास ही रहेगा!
यह कोई जंग नहीं, बल्कि एक खूबसूरत जुगलबंदी है
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे डॉ जीपी राव ने जब बोलना शुरू किया, तो हॉल में बैठा हर शख्स उनकी बातों में खो सा गया। उन्होंने बेहद व्यावहारिक अंदाज में समझाया कि अक्सर लोग इस बहस को ‘एआई बनाम इंसानी दिमाग’ का नाम दे देते हैं, जो कि सरासर गलत है। डॉ राव का कहना था, “यह कोई मुकाबला नहीं है, बल्कि एक जुगलबंदी है। जब आप एआई की रफ्तार और इंसान के अनुभव को एक साथ मिला देते हैं, तो यह ‘ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस’ यानी संवर्धित बुद्धिमत्ता का रूप ले लेती है। एआई डेटा दे सकता है, पर उस डेटा के पीछे छिपे इंसान के दर्द या जरूरत को समझने के लिए इंसान की ही जरूरत होगी।” उन्होंने दफ्तरों में एआई के सही, नैतिक और जिम्मेदारी से भरे इस्तेमाल के कई मजेदार और आसान तरीके भी शेयर किए।

तकनीक के दौर में भी ‘इंसानी अहसास’ ही रहेगा सबसे बड़ा हथियार
सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद CCL के निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र ने अपनी बात बहुत ही दिल छू लेने वाले अंदाज में रखी। उन्होंने कहा कि आज हम चाहे जितने भी डिजिटल क्यों न हो जाएं, किसी भी कंपनी या संस्थान की असली ताकत उसके लोग और उनकी भावनाएं ही होती हैं। हर्ष नाथ मिश्र ने कहा, “अगर हम एआई की काबिलियत के साथ इंसानी संवेदनाओं को जोड़ दें, तो न सिर्फ फैसले बेहतर होंगे, बल्कि दफ्तर का माहौल और कर्मचारियों की उत्पादकता भी नई ऊंचाइयों को छुएगी।” उन्होंने NIPM रांची चैप्टर की इस पहल को वक्त की जरूरत बताया।
सीखने का ऐसा सिलसिला जो याद रहेगा
कार्यक्रम की शुरुआत NIPM पूर्वी क्षेत्र के उपाध्यक्ष संजय कुमार ठाकुर के गर्मजोशी भरे स्वागत भाषण और फूलों के गुलदस्ते के साथ हुई थी। लेकिन जब सत्र खत्म हुआ, तो किसी का भी जाने का मन नहीं हो रहा था। विभिन्न कंपनियों से आए अधिकारियों और युवाओं का कहना था कि एआई को लेकर उनके मन में जो भी हिचक या डर था, इस सत्र ने उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया। सबने यही माना कि एआई से डरने की नहीं, बल्कि उसे अपना दोस्त बनाकर साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। आखिर दिन के अंत में, तकनीक सिर्फ एक जरिया है, असली मास्टरमाइंड तो इंसान ही है।
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