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Ranchi : आमतौर पर जब भी किसी सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम में सतर्कता यानी विजिलेंस की बात होती है, तो लोगों के जेहन में फाइलों की जांच, नियम-कायदे और गंभीर दफ्तरों की तस्वीर उभरती है। लेकिन इस बार रांची के दरभंगा हाउस परिसर में माहौल कुछ अलग होने वाला है। यहां नियम-कायदों की गंभीरता के बीच रंगों की खुशबू घुलेगी, सुरों की तान छेड़ी जाएगी और ब्रश के जरिए ईमानदारी की नई परिभाषाएं गढ़ी जाएंगी। मौका है CCL के सतर्कता महोत्सव 2026 का, जो 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित होने जा रहा है।
इस बार महोत्सव को एक बेहद खूबसूरत सोच के साथ जोड़ा गया है, “सत्यनिष्ठा से समृद्धि”। मकसद साफ है कि जब सोच साफ होगी, काम में पारदर्शिता होगी, तभी सही मायनों में तरक्की आएगी। खास बात यह है कि इस गंभीर संदेश को आम लोगों और कर्मचारियों तक पहुंचाने के लिए भाषणों के बजाय कला, संस्कृति और रचनात्मकता का सहारा लिया गया है।
कंक्रीट की सड़कों पर उतरेंगे विचार, रंगों से सजेगा आंगन
सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह 10:30 बजे जैसे ही उद्घाटन की घंटी बजेगी, पूरा परिसर एक रचनात्मक मेले में तब्दील हो जाएगा। सबसे पहले सुबह 11:30 बजे से स्ट्रीट पेंटिंग का मुकाबला शुरू होगा। जहां अमूमन गाड़ियां चलती हैं, वहां दो-दो साथियों की टोलियां बैठकर सड़क के कैनवास पर समाज और ईमानदारी से जुड़े अपने नजरिए को उकेरेंगी।
ठीक इसी के आसपास, यानी सुबह 11:45 बजे से रंगोली की बिसात बिछेगी। दो घंटे तक प्रतिभागी जमीन पर रंगों और अबीर से ऐसे डिजाइन बनाएंगे, जो देखने वालों को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दें। दोपहर के खाने के बाद, यानी 2:30 बजे से मिट्टी के साधारण बर्तनों और गमलों पर कलाकारी का हुनर परखा जाएगा। शाम ढलते-ढलते 4:00 बजे से मंच पर दिखेगी “नारी शक्ति वंदन” की प्रस्तुति, जिसमें सामूहिक रूप से महिलाएं अपनी ऊर्जा और सांस्कृतिक रंग बिखेरेंगी।

सुर, साज और चेहरे पर सजेगी अभिव्यक्ति
अगले दिन यानी मंगलवार, 27 अक्टूबर को भी यह रौनक कम नहीं होगी। सुबह 11:00 बजते ही दो अलग-अलग तरह के हुनर एक साथ देखने को मिलेंगे। एक तरफ फेस पेंटिंग का मुकाबला होगा, जहां चेहरे ही कैनवास बन जाएंगे और उन पर ब्रश के जरिए भाव उकेरे जाएंगे।
दूसरी तरफ, परिसर में सुरों की महफिल सजेगी। एकल गायन यानी सोलो सिंगिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागी अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे। दो दिन तक चलने वाले इस रचनात्मक मुकाबले के बाद दोपहर 12:30 बजे समापन सत्र रखा गया है, जहां बेहतरीन काम करने वाले प्रतिभागियों की हौसला-अफजाई की जाएगी और उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।
कला के रास्ते दिल में उतरती है सीख
दफ्तर की रोजमर्रा की भागदौड़ और फाइलों के अंबार के बीच इस तरह का आयोजन एक ठंडी हवा के झोंके जैसा है। CCL की यह पहल बताती है कि ईमानदारी, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों जैसे भारी-भरकम शब्दों को अगर दिल तक पहुंचाना हो, तो कला से बेहतर कोई दूसरा रास्ता नहीं हो सकता। जब कोई कर्मचारी या उसका साथी हाथ में रंग लेकर कैनवास पर उतरता है, तो वह सिर्फ पेंटिंग नहीं बनाता, बल्कि अपने भीतर के नैतिक संकल्प को भी मजबूत करता है। दो दिनों तक दरभंगा हाउस का यह कोना सिर्फ कोयला उद्योग के दफ्तर के रूप में नहीं, बल्कि विचारों और प्रतिभाओं के एक जीवंत उत्सव के रूप में नजर आएगा।
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