अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : दफ्तर की रोजमर्रा की भागदौड़, कोयले के उत्पादन से जुड़े तकनीकी आंकड़े और फाइलों के लंबे चौड़े पन्नों के बीच अक्सर भाषा सिर्फ एक माध्यम बनकर रह जाती है। मगर शुक्रवार की दोपहर रांची के दरभंगा हाउस स्थित गंगोत्री कन्वेंशन सेंटर का नजारा बिल्कुल जुदा था। यहां CCL के संगम सभागार में जब राजभाषा माह का समापन समारोह सजा, तो लगा मानो शब्दों ने अपनी औपचारिकता उतार फेंकी हो और वे सुर, संवाद तथा भावनाओं में ढल गए हों। पूरे महीने कर्मचारियों ने जिन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, उनके विजेताओं के चेहरों की चमक और तालियों की गूंज इस बात का सबूत थी कि मातृभाषा दिल के कितने करीब होती है।
दीप की लौ, गणेश वंदना और 150 साल पुराने तराने की गूंज
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और अतिथियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुई। इसके तुरंत बाद जब वंदे मातरम् और कोल इंडिया गीत के सुर गूंजे, तो पूरा हॉल एक सुर में बंध गया। गणेश वंदना के शांत और पावन सुरों के बाद मंच पर एकल अभिनय का दौर शुरू हुआ, जहां कर्मचारियों ने अपने भीतर छिपे मंझे हुए अदाकार को बाहर निकाला। दिन का सबसे भावुक और असरदार लम्हा वह था जब राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर कलाकारों ने एक संगीतमय नाटक पेश किया। इतिहास की यादों और आजादी के तराने को जब मंच पर जीवंत किया गया, तो सभागार में बैठे हर शख्स की आंखें गर्व से नम थीं और तालियों की गड़गड़ाहट देर तक थमी नहीं।
जब वरिष्ठ व्यंग्यकार ने कहा- इन प्रस्तुतियों ने मुझे निशब्द कर दिया
समारोह में झारखंड के जाने-माने साहित्यकार, व्यंग्यकार और शिक्षाविद डॉ. अशोक प्रियदर्शी बतौर खास मेहमान मौजूद थे। हिंदी साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान को नमन करते हुए CCL ने उन्हें ‘राजभाषा भास्कर सम्मान’ से नवाजा। मंच से बोलते हुए डॉ. प्रियदर्शी का गला भर आया। उन्होंने बेहद सादगी से कहा कि कर्मचारियों की इतनी उम्दा और दिल से निकली प्रस्तुतियां देखकर वे सचमुच निशब्द हैं। यहां आकर उन्हें गर्व का अनुभव हो रहा है क्योंकि यह महज एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि अपनी भाषा के प्रति सच्ची लगन का खुला इजहार है।
काम में हिंदी केवल नियम नहीं, हमारी पहचान और फख्र है
समारोह में CCL के आला अधिकारियों ने भी अपने दिल की बात खुलकर रखी। निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा ने बेहद अपनेपन से कहा कि यह आयोजन उनके दिल के बहुत करीब है और दफ्तर के रोजमर्रा के कामकाज में हिंदी लिखना और बोलना उन्हें हमेशा एक स्वाभाविक गर्व देता है। निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र ने भाषा को पीढ़ियों से जोड़ते हुए कहा कि भाषा हमारी जड़ें और विरासत है, जिसे बचाना और आने वाली पीढ़ी को सौंपना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। मुख्य सतर्कता अधिकारी पंकज कुमार ने याद दिलाया कि राजभाषा हमारे राष्ट्रीय मान और प्रतीकों का अटूट हिस्सा है, जिसे आगे बढ़ाना हर नागरिक का कर्तव्य है।
स्वागत का सिलसिला महाप्रबंधक (राजभाषा) अशोक कुमार के शब्दों से शुरू हुआ था और अंत में दीविक दिवेश ने सभी का आभार जताया। जब सभी ने एक साथ खड़े होकर राष्ट्रगान गाया, तो यह सिर्फ एक महीने के उत्सव का अंत नहीं था, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में हिंदी को और गहराई से अपनाने का एक नया संकल्प था।
इसे भी पढ़ें : रांची में सजेगा CCL का दूसरा नेशनल पीआर कॉन्क्लेव, अपना हुनर दिखाने का खुला मैदान



