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Ranchi : रविवार की सुहानी शाम, त्योहार की आहट और मेले की चहल-पहल। रांची के जेसोवा दिवाली मेले के चौथे दिन कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल शहरवासियों के दिल को छू गया। छुट्टी का दिन होने की वजह से लोग दोपहर ढलते ही पूरे परिवार के साथ मेला घूमने निकल पड़े थे। किसी के हाथ में सजावटी दीये और पारंपरिक हस्तशिल्प के झोले थे, तो कोई गरमा-गरम पकवानों का स्वाद चखने में मशगूल था। देखते ही देखते पूरा मेला परिसर हंसी, ठिठोली और त्योहार की खुशियों से गुलजार हो गया।
खाट पर गपशप और कठपुतली का नाच, शहर में दिखा ठेठ गांव
मेले के एक कोने में कदम रखते ही ऐसा महसूस हो रहा था मानो कंक्रीट के इस शहर के बीच कोई जिंदा गांव बस गया हो। मिट्टी की सौंधी खुशबू, कुएं की जगत, सूत कातने का चरखा और लाठी के सहारे चूड़ियां ढालते कारीगरों ने हर आने-जाने वाले के कदम रोक दिए। बुजुर्ग जहां खाट पर बैठकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे, वहीं नई पीढ़ी इस सादगी को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए उत्सुक नजर आई। थोड़ी ही दूरी पर ढोलक की थाप पर थिरकती कठपुतलियों का तमाशा चल रहा था, जिसे देखकर बच्चों की खिलखिलाहट पूरे माहौल को और भी अपनापन दे रही थी। यह कोना सिर्फ देखने की चीज नहीं था, बल्कि अपनी जड़ों और लोक कला से सीधे जुड़ने का एक जरिया बन चुका था।

रंग-बिरंगी पोशाकों में नन्हें कलाकार और मंच पर गूंजता संगीत
जैसे-जैसे शाम गहरी हुई, मेले का रंग और चटख होता गया। मंच पर जब फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता शुरू हुई, तो अलग-अलग किरदारों में सजे नन्हे बच्चों ने अपने भोलेपन और आत्मविश्वास से सबका ध्यान खींच लिया। कोई नन्हा कान्हा बनकर मुस्कुरा रहा था तो कोई नन्हीं परी बनकर मंच पर इतरा रही थी। बच्चों की इस मासूमियत और हुनर की हौसला अफजाई के लिए पूरा पंडाल देर तक तालियों से गूंजता रहा। नन्हें प्रतिभागियों को उनकी रचनात्मकता के लिए सम्मानित किया गया, जिससे उनके चेहरों पर अलग ही खुशी तैर गई।
इसके ठीक बाद का माहौल पूरी तरह संगीत की ऊर्जा से भर उठा। जब लाइव बैंड के कलाकारों ने गिटार के तार छेड़े और ड्रम की थाप दी, तो युवाओं की टोली खुद को थिरकने से नहीं रोक पाई। एक के बाद एक शानदार गानों की प्रस्तुति ने पूरे प्रांगण को संगीत के दरिया में तब्दील कर दिया। निर्णायक मंडल की परख के बीच बैंड्स के बीच सुरों की मीठी जंग चली, जिसमें बेहतरीन धुनों ने लोगों को देर रात तक बांधे रखा। इसके बाद विपुल नायक और उनकी टीम ने अपनी दमदार परफॉर्मेंस से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक अपनी जगह खड़े होकर झूमने लगे। चौथे दिन की यह शाम खरीदारी के उत्साह, गांव की सादगी और संगीत के उल्लास के साथ हर किसी के दिल में एक खूबसूरत याद बनकर बस गई।
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