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Godda : जमीन अधिग्रहण के नाम पर अक्सर सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां नापते ग्रामीणों की तस्वीर आम मानी जाती है, लेकिन सुंदरपहाड़ी प्रखंड परिसर में मंगलवार का नजारा कुछ अलग था। जितपुर खनन परियोजना के तहत प्रभावित जमीन मालिकों को उनका हक दिलाने के लिए प्रशासन खुद गांव वालों के बीच पहुंचा। जिला प्रशासन की पहल और टेरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से लगे इस खास शिविर में तेलभीटा और पहाड़पुर गांव के रैयतों की भीड़ उमड़ी। उद्देश्य साफ था कि किसी भी किसान या जमीन मालिक को मुआवजे के लिए भटकना न पड़े और कागजी काम मौके पर ही निबट जाए।
चौपाल जैसा माहौल और कागजों की तफ्तीश
शिविर में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल बन गया था। मौजा तेलभीटा और मौजा पहाड़पुर से आए बुजुर्ग और नौजवान अपनी जमीन के पुराने दस्तावेज, खतियान और पहचान पत्र लिए कुर्सियों पर बैठे नजर आए। कई रैयतों के मन में इस बात की उलझन थी कि फॉर्म कैसे भरना है और कौन सा कागज कहां लगाना है। प्रशासनिक कर्मियों और कंपनी के प्रतिनिधियों ने हर एक किसान के पास बैठकर उनकी शंकाएं दूर कीं। रैयतों ने मुआवजा पाने के लिए जरूरी बॉन्ड भरे और अपने दस्तावेज जमा किए। मौके पर ही दस्तावेजों की जांच होने से ग्रामीणों को बार-बार ब्लॉक ऑफिस आने-जाने के झंझट से राहत मिली।

मेज के एक तरफ अफसर, दूसरी तरफ ग्रामीण
अक्सर बड़ी परियोजनाओं में कंपनी, प्रशासन और जमीन मालिकों के बीच तालमेल की कमी देखने को मिलती है, पर यहां दोनों पक्ष एक साथ काम करते दिखे। अंचल अधिकारी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और अंचल के कर्मचारियों ने सीधे रैयतों से बात की। वहीं टेरी माइनिंग के साइट हेड और उनकी टीम के सदस्य भी पूरे समय कैंप में डटे रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को साफ लफ्जों में बताया कि उनकी जमीन का ब्योरा क्या है, नियमों के मुताबिक कितना मुआवजा बनता है और बैंक खाते में सीधे रकम पहुंचने की पूरी प्रक्रिया क्या रहेगी।
पारदर्शिता से बनेगी बात और बढ़ेगा भरोसा
शिविर का असली मकसद सिर्फ फॉर्म जमा कराना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर लोगों का भरोसा जीतना था। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के पास ही ऐसा कैंप लगने से उन्हें दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना पड़ेगा। उधर, जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने साफ किया कि जितपुर खनन परियोजना को तय नियमों और कानूनों के तहत ही आगे बढ़ाया जा रहा है। रैयतों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें समय पर उचित मुआवजा दिलाना पहली प्राथमिकता है, ताकि बिना किसी विवाद के क्षेत्र में विकास और खनन का काम पटरी पर आ सके।
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