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Ranchi : झारखंड में शिक्षा की चमक और करियर बनाने का सपना लिए वर्किंग प्रोफेशनल्स आज निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। रांची, बोकारो और जमशेदपुर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में B.Tech/B.E. में नामांकन लेने वाले इन छात्रों का भविष्य पिछले 16 महीनों से अधर में लटका हुआ है। वजह… झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (JUT) की सुस्त कार्यप्रणाली।
छात्र संघ का नेतृत्व, कुलपति से लेकर मंत्री तक गुहार
शनिवार को टेक्निकल छात्र संघ के बैनर तले अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में दर्जनों छात्र प्रतिनिधि JUT पहुंचे। वे निदेशक पाठ्यक्रम स्नेहा कुमार से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा। छात्रों का आरोप था कि तमाम औपचारिकताएं पूरी करने और फीस जमा करने के बावजूद नामांकन की प्रक्रिया को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया।
निदेशक ने भरोसा दिलाया कि इस पर जल्द ही बैठक होगी और छात्रों के हित में फैसला लिया जाएगा। लेकिन छात्रों की बेचैनी यहीं खत्म नहीं हुई। वे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से भी मिले और समस्या की पूरी जानकारी साझा की। मंत्री ने भी तुरंत पत्र को प्रधान सचिव तक पहुंचाकर संज्ञान लिया।
क्यों फंसा है मामला?
कभी डिप्लोमा पास वर्किंग प्रोफेशनल्स को AMIE जैसी डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए इंजीनियरिंग पढ़ने का मौका मिलता था। लेकिन 2013 के बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया। इसके बाद UGC और AICTE ने तय किया कि चुनिंदा राज्यों के कुछ कॉलेजों को ही वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए B.Tech की अनुमति होगी। झारखंड के रांची, बोकारो और जमशेदपुर के कुछ कॉलेजों को भी इस सूची में शामिल किया गया। इन्हीं कॉलेजों में पिछले कुछ सालों से वर्किंग प्रोफेशनल्स इंजीनियरिंग पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन इस बार, 2024-25 सत्र में नामांकन की प्रक्रिया बीच रास्ते में ही अटक गई।
छात्रों की नाराजगी और चिंता
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि सभी छात्रों ने विभागीय NOC, मूल कागजात और रजिस्ट्रेशन शुल्क समय पर जमा कर दिया था। अस्थायी नामांकन भी हो चुका है। लेकिन JUT ने 16 महीने बाद भी अंतिम पंजीकरण नहीं किया। इससे न सिर्फ उनका वर्तमान शैक्षणिक सत्र प्रभावित हुआ है, बल्कि उनकी आगे की पढ़ाई और प्रमोशन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
लक्ष्मण कुमार, सुमन मंडल, अनीश पासवान, सुमित कुमार और रोहित कुमार जैसे छात्रों ने बताया कि पुराने सत्रों के छात्रों की परीक्षाएं भी समय पर नहीं हो रही हैं। इस कारण वे नौकरी और पढ़ाई दोनों मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं।
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