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Ranchi : JUVNL यानी झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और इसकी तीनों सहयोगी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए इन दिनों एक अजीब स्थिति बन गई है। पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस के दायरे में आने वाले कर्मचारियों और अफसरों की जेब से हर महीने भविष्य निधि (GPF) का पैसा तो कट रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे अपनी ही इस जमा पूंजी से एक रुपया भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इस गंभीर मसले को लेकर अब झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ मुखर हो गया है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) को एक बार फिर से पत्र भेजकर मामले में फौरन दखल देने और राहत देने की मांग उठाई है।
ट्रस्ट नहीं बनने से फंसा कर्मचारियों का हक
यूनियन के अनुसार निगम मुख्यालय से यह बात सामने आई है कि अब तक जीपीएफ ट्रस्ट का विधिवत गठन ही नहीं हो सका है। इसी प्रशासनिक पेच की वजह से कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक मिलने वाला जीपीएफ एडवांस और निकासी की सुविधा पूरी तरह अटकी हुई है। अजय राय ने साफ कहा कि जब हर महीने वेतन से तय राशि की कटौती नियमित रूप से हो रही है, तो फिर ट्रस्ट बनाने में इतनी देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपनी ही बचत का पैसा जरूरत के वक्त न मिल पाना कर्मचारियों के साथ पूरी तरह नाइंसाफी है और निगम को बिना देर किए इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए।
जरूरत के वक्त खाली हाथ रहने को मजबूर कर्मचारी
भविष्य निधि की यह रकम कर्मचारियों की मेहनत की कमाई होती है, जो उनके बुढ़ापे और आपात स्थिति का सबसे बड़ा सहारा बनती है। किसी को अपना घर बनवाना है, किसी के घर में बच्चों की शादी है, तो कोई परिवार में गंभीर बीमारी के इलाज के लिए परेशान है। ऐसे कठिन समय में भी जब कर्मियों को उनके अपने पैसे से वंचित रखा जाता है, तो उनके सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। संघ ने कहा कि वर्षों तक पसीना बहाकर बचाई गई रकम पर रोक लगना बेहद चिंताजनक है, इसलिए जब तक ट्रस्ट का अंतिम गठन नहीं हो जाता, तब तक प्रबंधन एक अंतरिम व्यवस्था बनाकर निकासी की छूट दे।
पैसों के रखरखाव और हिसाब-किताब में पारदर्शिता की मांग
श्रमिक संघ ने प्रबंधन के सामने यह सवाल भी रखा है कि अब तक काटी गई भारी-भरकम राशि कहां रखी गई है और इसका प्रबंधन किस खाते या नियम के तहत हो रहा है। अजय राय ने मांग की है कि जीपीएफ मद के कुल पैसे, उसके रखरखाव और पूरे हिसाब-किताब को कर्मचारियों के सामने पूरी तरह पारदर्शी रखा जाए। साथ ही पहले दिए गए ज्ञापनों पर अब तक क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए। संघ ने उम्मीद जताई है कि सीएमडी स्तर से इस मामले में जल्द संज्ञान लिया जाएगा, ताकि हजारों कर्मियों को राहत मिल सके।
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