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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिले में पचुवाड़ा नॉर्थ और सेंट्रल कोल ब्लॉक में कोयला खनन करने वाली कंपनियों के खिलाफ विस्थापित परिवारों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों ग्रामीण पिछले पांच दिनों से समाहरणालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हो रहे हैं। धरना स्थल पर विशनपुर, चिलगो, आमझारी, तालझारी, कठालडीह, पचुवाड़ा, डांगापाड़ा और आलुबेड़ा गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। आंदोलनकारी लगातार कोल कंपनियों और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
वादे पूरे नहीं करने का आरोप
धरना पर बैठे ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खनन परियोजना के कारण उनकी जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास से जुड़े वादों को पूरा किया गया। आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन के साथ-साथ पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (WBPDCL) और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन और पुनर्वास से संबंधित नियमों की अनदेखी की गई है। इसके अलावा रैयतों से किए गए कई वादे आज तक अधूरे पड़े हैं। उनका यह भी आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के नए नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
प्रति एकड़ 1.16 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
धरना दे रहे विस्थापित परिवारों की प्रमुख मांग है कि झारखंड सरकार द्वारा लागू नए भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार उन्हें प्रति एकड़ 1 करोड़ 16 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में पुरानी दरों पर मुआवजा देना न्यायसंगत नहीं है और प्रभावित परिवारों को उनका उचित अधिकार मिलना चाहिए।
डीएमएफटी की राशि गांवों के विकास पर खर्च करने की मांग
आंदोलनकारियों ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की 90 प्रतिशत राशि प्रभावित गांवों के विकास पर खर्च करने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि खनन से सबसे अधिक प्रभावित गांवों को विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में डीएमएफटी की राशि का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर किया जाना चाहिए।
कंपनियों की मनमानी रोकने की मांग
धरना में शामिल लोगों ने पीएसपीसीएल और डब्ल्यूबीपीडीसीएल की कथित मनमानी पर रोक लगाने की मांग भी की है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनियां प्रभावित लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। उन्होंने रैयतों की प्रस्तावित समिति के साथ वार्ता कर सभी लंबित मुद्दों का समाधान निकालने की मांग की है।
ज्ञापन देने के बाद भी नहीं हुई पहल
धरना का नेतृत्व कर रहे लुखीराम मुर्मू, रामलाल हांसदा, दानियल मुर्मू, कलम सोरेन और मोहन मुर्मू समेत अन्य नेताओं ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर पहले ही उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मोर्चा नेताओं का कहना है कि लगातार उपेक्षा के कारण विस्थापित परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मांगों को लेकर अड़े हैं विस्थापित
धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। अब वे किसी आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई चाहते हैं। इसी वजह से सैकड़ों परिवार एकजुट होकर आंदोलन में शामिल हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर पूरी मजबूती के साथ डटे हुए हैं। प्रशासन और कंपनियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने के कारण आंदोलन आगे और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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