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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : किसी के चेहरे पर झुर्रियों के बीच खिली मुस्कान थी, तो किसी की आंखों में बरसों पुरानी हसरत पूरी होने के आंसू। उम्र के आखिरी पड़ाव पर जब अपनों का साथ छूट जाता है, तब जिंदगी चारदीवारी में सिमट कर रह जाती है। ऐसे ही अकेलेपन से जूझ रहे पालू स्थित ‘डिवाइन ओंकार ओल्ड एज होम’ के 30 से ज्यादा बुजुर्गों के लिए मंगलवार की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आई। वर्षों से टीवी स्क्रीन और अखबारों में राम मंदिर की तस्वीरें देखकर जो बुजुर्ग सिर्फ हाथ जोड़ लिया करते थे, वे आज खुद साक्षात रामलला के दर्शन करने अयोध्या रवाना हो गए। इस सपने को पंख लगाए हैं बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (BFCL) ने, जिसने इन बुजुर्गों की यात्रा का पूरा जिम्मा उठाकर समाज के सामने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है।

साधनों की तंगी से रुकी थी राह, दिल में थी दर्शन की तड़प
वृद्धाश्रम के बरामदे में बैठकर अक्सर ये बुजुर्ग आपस में अयोध्या की बातें किया करते थे। कोई कहता कि काश जिंदगी खत्म होने से पहले एक बार प्रभु श्रीराम की चौखट पर माथा टेक पाते, तो कोई अपनी लाचारी और खाली जेब देखकर लंबी सांस भरकर रह जाता था। शरीर साथ नहीं देता और जेब में इतना पैसा नहीं था कि खुद से सफर का खर्च उठा सकें। जब BFCL की टीम को इन बुजुर्गों के मन की इस गहरी इच्छा के बारे में पता चला, तो उन्होंने इसे सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि बुजुर्गों के जीवन में खुशियां लौटाने का जरिया बनाया। कंपनी ने बुजुर्गों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एक आरामदायक बस का इंतजाम किया, ताकि रास्ते में किसी को कोई शारीरिक तकलीफ न हो।

हाथों में माला, जुबां पर जय श्रीराम और सफर की शुरुआत
पालू स्थित वृद्धाश्रम से जब बस रवाना होने वाली थी, तब वहां का नजारा देखने लायक था। बुजुर्गों को नए कपड़े और जरूरी सामान के साथ विदा किया गया। बस में बैठते ही माहौल भक्तिमय हो गया। किसी ने हाथ में माला थाम रखी थी, तो कोई सफर शुरू होते ही ‘जय श्रीराम’ के जयकारे लगाने लगा। बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस उम्र में कोई उनके इस सपने को इस तरह पूरा करेगा। यह सफर उनके लिए सिर्फ एक तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि जीवन के खालीपन के बीच सुकून और आत्मीयता का अनमोल एहसास है। अयोध्या पहुंचकर ये बुजुर्ग रामलला के दर्शन करेंगे, सरयू नदी के दर्शन करेंगे और संतों की नगरी में समय बिताएंगे।
अपनों जैसा ख्याल रखकर टीम ने संभाली पूरी कमान
बुजुर्गों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए BFCL की टीम ने परिवार के सदस्यों की तरह हर छोटी-बड़ी तैयारी की। रास्ते में खान-पान, दवाइयां, ठहरने की व्यवस्था और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। इस पूरे आयोजन को जमीन पर उतारने में BFCL के सीएसआर सीनियर जीएम राकेश गुप्ता की अगुवाई में अदिति, नितेश अग्रवाल और प्रतिष्ठा पाठक की टीम ने दिन-रात एक किया। कंपनी का मानना है कि बुजुर्ग हमारे समाज की नींव हैं और उनका सम्मान करना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। बुजुर्गों की यह यात्रा यह साबित करती है कि अगर नीयत में सेवा का भाव हो, तो किसी के बुझे हुए चेहरे पर भी जिंदगी की सबसे खूबसूरत मुस्कान लौटाई जा सकती है।
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