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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सड़क किनारे धूल और खून से सनी एक बेबस महिला दर्द से कराह रही थी। गाड़ियां आ रही थीं, रफ्तार धीमी होती, लोग मुड़कर देखते और आगे निकल जाते। कुछ लोग रुके भी, तो जेब से मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे। किसी ने आगे बढ़कर हाथ थामने की जहमत नहीं उठाई। मगर तभी सायरन वाली एक सरकारी गाड़ी की रफ्तार थमी, दरवाजा खुला और दो पुलिस अफसर बाहर निकले। चंद मिनटों में खाकी ने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर सिर्फ कानून का पहरा नहीं, बल्कि धड़कता हुआ एक संवेदनशील दिल भी होता है।
चैनगड्डा ओवरब्रिज पर हुआ था हादसा
यह वाकया रामगढ़ जिले के भदानीनगर ओपी क्षेत्र अंतर्गत चैनगड्डा ओवरब्रिज के पास का है। रोजमर्रा की तरह व्यस्त सड़क पर एक अज्ञात बाइक सवार ने राह चलती महिला को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि महिला उछलकर दूर जा गिरी। उसके सिर और शरीर से खून बह रहा था। परिजन मौके पर पहुंचने की जद्दोजहद में थे, लेकिन उन्हें कोई सवारी नहीं मिल रही थी। आसपास लोग खड़े तमाशा देख रहे थे, पर अस्पताल पहुंचाने की सुध किसी को नहीं थी।
एंबुलेंस का इंतजार छोड़, खुद की गाड़ी से पहुंचे अस्पताल
उसी वक्त रामगढ़ पुलिस लाइन के एक कार्यक्रम से भदानीनगर ओपी प्रभारी अख्तर अली और पतरातू थानेदार शिवलाल कुमार गुप्ता लौट रहे थे। सड़क किनारे भीड़ और तड़पती महिला पर जैसे ही दोनों अफसरों की नजर पड़ी, उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। बिना एंबुलेंस या औपचारिकता का इंतजार किए, दोनों ने अपनी सरकारी गाड़ी रोकी, नीचे उतरे और महिला को सहारा देकर उठाया। अफसरों ने अपनी ही गाड़ी की पिछली सीट पर महिला को लिटाया और तुरंत नजदीकी अस्पताल के लिए रवाना हो गए। समय पर इलाज मिलने से महिला की हालत अब खतरे से बाहर है।
अफसरों की अपील… वीडियो बनाने के बजाय हाथ बढ़ाएं
थानेदार अख्तर अली ने इस घटना के बाद लोगों से अपील करते हुए कहा कि सड़क पर किसी को तड़पता देखकर आगे बढ़ जाना या वीडियो बनाना इंसानियत नहीं है। हादसे के बाद का शुरुआती ‘गोल्डन आवर’ सबसे कीमती होता है, अगर उस वक्त मदद मिल जाए तो किसी का पूरा परिवार उजड़ने से बच सकता है। वहीं पतरातू थानेदार शिवलाल कुमार गुप्ता ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने से भी बड़ा धर्म इंसान की जान बचाना है, और इसके लिए हर नागरिक को बिना डरे आगे आना चाहिए।
आमतौर पर पुलिस की पहचान सख्ती और रौब के लिए जानी जाती है, लेकिन रामगढ़ की सड़क पर इन दो जांबाज अफसरों ने जो मिसाल पेश की, उसने लोगों के दिलों में खाकी का मान और बढ़ा दिया है।
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