अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : रांची की शांत-सी सुबहों में अक्सर एक व्यक्ति अपनी क्लिनिक के दरवाजे समय से पहले खोल देता है। रोगियों की पीड़ा को कम करना ही जिसका रोज का पहला लक्ष्य होता है। वह व्यक्ति है डॉ. दिनेश ठाकुर, जिनके चेहरे पर हर मरीज के लिए वही अपनापन, वही धैर्य और वही मुस्कान रहती है। लेकिन इस बार उनकी यह यात्रा क्लिनिक से निकलकर जयपुर तक पहुंची। एक ऐसे मंच पर, जहां देश-विदेश के फिजियोथेरेपिस्ट एक साथ इकट्ठा होते हैं। 22 और 23 नवंबर को आयोजित यह दो दिवसीय न्यूरो फिजियो सम्मेलन देश में अपनी तरह का पहला आयोजन था। और रांची से डॉ. ठाकुर इसकी एक महत्वपूर्ण कड़ी बने।
रांची से जयपुर की यात्रा सिर्फ दूरी नहीं, एक पहचान की उड़ान थी
झारखंड से जाकर राष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाना आसान नहीं होता। डॉ दिनेश ठाकुर भी यह बात जानते थे। लेकिन उनकी वर्षों की मेहनत, अनुभव और मरीजों को ठीक करने के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया जहां जयपुर सम्मेलन में उन्हें वैज्ञानिक सत्र का चेयरपर्सन (जज) बनाया गया। यह जिम्मेदारी केवल एक पद नहीं थी, बल्कि उन हजारों मरीजों का विश्वास था जिन्होंने वर्षों से अपनी चाल, अपने दर्द और अपने शरीर को उनके भरोसे छोड़ रखा है।
सम्मेलन का मंच और रांची की आवाज
वैज्ञानिक सत्र में देश-विदेश के विशेषज्ञ मौजूद थे। यहां आधुनिक चिकित्सा विधियों पर चर्चा हुई। न्यूरो फिजियो की नई तकनीकों को साझा किया गया। जब सत्र शुरू हुआ, तो रांची का नाम उस बड़े मंच पर चमक उठा। चेयरपर्सन के रूप में डॉ. दिनेश ठाकुर न सिर्फ सत्र को संचालित कर रहे थे, बल्कि अपने अनुभव से कई चिकित्सकों का मार्गदर्शन भी कर रहे थे। कई प्रतिभागियों ने बाद में बताया कि जिस सहजता से वह जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाते हैं, वह उन्हें भी प्रेरित करता है।
सम्मान के क्षण और एक डॉक्टर की दिल को छू लेने वाली मुस्कान
सम्मेलन में जब एमजीएम कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी के प्रिंसिपल डॉ. मधुसूदन तिवारी, एमिटी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर डॉ. अंकित,
और विवेकानंद यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर डॉ. भूपेश गोयल ने उन्हें सम्मानित किया, तो वह क्षण सिर्फ एक पुरस्कार का नहीं था। यह एक छोटे शहर से बड़े सपनों को सच होते देखने का क्षण था। डॉ. दिनेश ठाकुर की मुस्कान में उस दिन विनम्रता भी थी और रांची के लिए गर्व भी।

कौन कहता है कि छोटे शहरों के डॉक्टर बड़ा नहीं कर सकते?
रांची के कई मरीजों ने यह खबर सुनी तो बोले… “हम रोज देखते हैं कि वह कितनी मेहनत करते हैं। हमें खुशी है कि देश ने भी उन्हें पहचाना।” जब एक डॉक्टर अपनी पहचान मरीजों के दर्द कम करके बनाता है, तब उसका सम्मान बड़े मंचों पर देर-सबेर जरूर होता है। डॉ. दिनेश ठाकुर की यह उपलब्धि उसी का प्रमाण है।
इसे भी पढ़ें : आम बगान दरिंदगी मामले में चार और धराये, SP क्या बोल गयीं… देखें



