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Home » जब रेलवे मैदान में फिर गूंजा ओंकारनाथ साह का नाम, भावुक हुए पुराने साथी
झारखंड

जब रेलवे मैदान में फिर गूंजा ओंकारनाथ साह का नाम, भावुक हुए पुराने साथी

June 21, 2026No Comments4 Mins Read
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रेलवे
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Pakur (Jaydev Kumar) : रेलवे मैदान का माहौल शनिवार को कुछ अलग था। यहां सिर्फ वॉलीबॉल के मैच नहीं खेले जा रहे थे, बल्कि उस शख्स को याद किया जा रहा था जिसने कभी इस जिले में वॉलीबॉल को नई पहचान दिलाने का सपना देखा था। मौका था पाकुड़ के वॉलीबॉल खेल के भीष्म पितामह माने जाने वाले स्व. ओंकारनाथ साह की 10वीं पुण्यतिथि का। जिला वॉलीबॉल संघ, पाकुड़ की ओर से आयोजित स्मृति वॉलीबॉल प्रतियोगिता में पुराने खिलाड़ियों से लेकर युवा प्रतिभाओं तक, हर कोई उन्हें अपनी-अपनी तरह से याद करता नजर आया। रेलवे मैदान में सुबह से ही खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। मैदान के एक तरफ युवा खिलाड़ी मैच की तैयारी में जुटे थे, तो दूसरी तरफ ओंकारनाथ साह के पुराने साथी और मित्र उनसे जुड़ी यादों को साझा कर रहे थे। कई लोगों के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आंखों में अपने पुराने साथी को खोने का दर्द भी साफ दिखाई दे रहा था।

एक खिलाड़ी नहीं, पूरी पीढ़ी के मार्गदर्शक थे ओंकारनाथ साह

कार्यक्रम की शुरुआत स्व. ओंकारनाथ साह के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि के साथ हुई। जैसे ही उनके चित्र पर फूल अर्पित किए गए, मैदान में मौजूद लोगों की यादें भी ताजा हो गईं। उनके समकालीन खिलाड़ी और मित्र लक्ष्मी नारायण शाह, संजय कुमार शाह और संजय कुमार ओझा ने बताया कि ओंकारनाथ साह सिर्फ अच्छे खिलाड़ी ही नहीं थे, बल्कि युवाओं को आगे बढ़ाने वाले मार्गदर्शक भी थे। उनका मानना था कि खेल सिर्फ जीतने का नाम नहीं है, बल्कि अनुशासन, समर्पण और टीम भावना भी उतनी ही जरूरी है। पुराने खिलाड़ियों ने बताया कि जब जिले में खेल सुविधाएं बहुत सीमित थीं, तब भी ओंकारनाथ साह युवाओं को मैदान तक लाने और उन्हें बेहतर खिलाड़ी बनाने के लिए लगातार प्रयास करते थे। उनके इसी जुनून का नतीजा था कि पाकुड़ के कई खिलाड़ियों ने जिले का नाम अलग-अलग प्रतियोगिताओं में रोशन किया।

बेटी ने निभाई पिता की विरासत

इस आयोजन का सबसे भावुक पल तब आया जब स्व. ओंकारनाथ साह की सुपुत्री श्रीमती दीपाली साह मैदान पहुंचीं। उन्होंने खिलाड़ियों के बीच जाकर उनसे बातचीत की और अपने पिता से जुड़ी कई बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा चाहते थे कि जिले के युवा खेल के माध्यम से आगे बढ़ें और अपनी अलग पहचान बनाएं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रोत्साहन के लिए एक वॉलीबॉल और एक वॉलीबॉल नेट भेंट किया। दीपाली साह ने कहा, “पिताजी खेल को लेकर हमेशा गंभीर रहते थे। उनका मानना था कि मैदान में मेहनत करने वाला खिलाड़ी जीवन में भी आगे बढ़ता है। आज युवाओं को खेलते देख ऐसा लगता है कि उनकी सोच आज भी जिंदा है।” उनकी इस पहल का खिलाड़ियों और आयोजकों ने जोरदार स्वागत किया। खिलाड़ियों ने कहा कि यह सिर्फ खेल सामग्री नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है जो उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देगी।

पुराने साथी मिले तो यादों का सिलसिला भी चला

कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे खिलाड़ी और खेल प्रेमी भी पहुंचे जो वर्षों बाद एक साथ मैदान में दिखाई दिए। बातचीत के दौरान पुराने दिनों की यादें बार-बार सामने आती रहीं। किसी ने पुराने टूर्नामेंटों का जिक्र किया तो किसी ने उन दिनों की बातें साझा कीं जब खिलाड़ी सीमित संसाधनों में भी घंटों अभ्यास किया करते थे। इन सभी यादों के केंद्र में ओंकारनाथ साह ही थे, जिनकी मेहनत और लगन ने कई खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी।

मुकाबलों में दिखा युवाओं का जोश

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद स्मृति वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। मैदान पर खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। हर अंक के साथ खिलाड़ियों का उत्साह और दर्शकों का रोमांच बढ़ता गया। युवा खिलाड़ियों में खास जोश देखने को मिला। कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन स्मैश और शानदार बचाव कर दर्शकों की तालियां बटोरीं। मैदान पर मौजूद लोगों का कहना था कि अगर ऐसे आयोजन लगातार होते रहे तो जिले से और भी बेहतर खिलाड़ी निकलकर सामने आएंगे।

खेल प्रेमियों की रही अच्छी मौजूदगी

कार्यक्रम में शहर के कई खेल प्रेमी और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। संजय कुमार राय, उजय राय, लाल्टू भौमिक, अविनाश पंडित, निर्भय सिंह, मिठू ठाकुर, चौधरी सर सहित कई लोगों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और स्व. ओंकारनाथ साह को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के अंत में जिला वॉलीबॉल संघ, पाकुड़ के सचिव हिसाबी राय ने सभी अतिथियों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ओंकारनाथ साह का योगदान सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज भी युवाओं को प्रेरित कर रहा है।

इसे भी पढ़ें : सरकारी बैंक में अफसर बनने का मौका, SBI PO के 1500 पदों पर Vacancy

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