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Pakur (Jaydev Kumar) : 2 जुलाई 2013 का वो काला दिन आज भी हर पुलिसकर्मी और पाकुड़ वासियों के जेहन में ताजा है। गुरुवार को पाकुड़ में एक बेहद भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जब काठीकुंड नक्सली हमले में शहीद हुए तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और उनके पांच जांबाज पुलिस साथियों को पूरे सम्मान के साथ याद किया गया। पुलिस परिवार और जिला प्रशासन की तरफ से आयोजित इस श्रद्धांजलि समारोह में हर किसी की आंखें नम थीं, लेकिन दिलों में इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान के प्रति गहरा गर्व भी था। समारोह में पाकुड़ के मौजूदा एसपी अनुदीप सिंह, एसडीपीओ कुमार गौरव, डीडीसी अरविंद कुमार लाल, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन और डीटीओ मो. मुजाहिद अंसारी समेत प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों ने शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की प्रतिमा पर फूल-माला चढ़ाकर उन्हें नमन किया। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखा और वीर आत्माओं की शांति के लिए दुआ की।
शहीदों के परिवारों और घायल जांबाज को किया गया सम्मानित
पुलिस महकमा अपने इन हीरोज के परिवारों को कभी नहीं भूलता। इस खास मौके पर एसपी अनुदीप सिंह ने शहीद जवानों के परिजनों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की। सिर्फ इतना ही नहीं, उस खौफनाक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए निजी चालक धनराज मड़ैया को भी मंच पर सम्मानित किया गया। उनकी बहादुरी को सलाम करते हुए पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरा पुलिस महकमा हमेशा इन परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
“आज हम सुरक्षित हैं, तो इन वीरों की बदौलत”
सभा को संबोधित करते हुए एसपी अनुदीप सिंह काफी भावुक नजर आए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि एसपी अमरजीत बलिहार और उनके साथियों ने जो बलिदान दिया है, वह आने वाली पीढ़ियों और पुलिस बल को हमेशा देश सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। एसपी अनुदीप सिंह ने कहा कि अगर आज पाकुड़ जिला और पूरा संथाल परगना इलाका नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर पूरी तरह आजाद और सुरक्षित महसूस कर रहा है, तो इसके पीछे हमारे इन वीर जवानों की शहादत है। जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस परिवार हर चुनौती से टकराने को हमेशा तैयार रहेगा। एसपी ने इस मौके पर एक बड़ा ऐलान भी किया। उन्होंने कहा कि इस नक्सली हमले में शहीद हुए बाकी पांच जवानों की याद में भी बहुत जल्द जिले में प्रतिमाएं (मूर्तियां) लगवाई जाएंगी, ताकि लोग जब भी वहां से गुजरें, उन्हें अपने इन रक्षकों की बहादुरी की याद आती रहे।
काठीकुंड नक्सली हमले में शहीद हुए तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और उनके 5 जांबाज साथियों को पाकुड़ में श्रद्धांजलि दी गई। एसपी अनुदीप सिंह ने कहा कि इन्हीं वीरों की शहादत की बदौलत आज संथाल परगना नक्सल मुक्त है। #JharkhandPolice #Martyrs #Pakur #JharkhandNews #NewsSamvad #LatestNews pic.twitter.com/TCC284qrHH
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क्या हुआ था 2 जुलाई 2013 के उस काली दोपहर को?
साल 2013 की 2 जुलाई को तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार दुमका में डीआईजी की एक जरूरी मीटिंग में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि रास्ते में मौत घात लगाए बैठी है। जैसे ही उनका काफिला काठीकुंड थाना क्षेत्र के जमनीनाला के पास पहुंचा, पहले से छिपे नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस अचानक हुए कायरतापूर्ण हमले में एसपी अमरजीत बलिहार ने मोर्चे पर ही दम तोड़ दिया। उनके साथ उनके अंगरक्षक चंदन थापा, सरकारी गाड़ी के ड्राइवर वीरेंद्र श्रीवास्तव, और जवान राजीव कुमार शर्मा, संतोष मंडल व मनोज हेम्ब्रम भी देश के लिए शहीद हो गए। इस हमले में उनके निजी ड्राइवर धनराज मड़ैया और एक अन्य जवान गोलियों की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो गए थे।
शहादत का बदला : एक बड़े अभियान ने बदल दी पूरे इलाके की तस्वीर
इस दर्दनाक घटना ने झारखंड पुलिस को हिलाकर रख दिया था। अपने कप्तान और साथियों को खोने के बाद पुलिस ने ठान लिया था कि वे इस इलाके को नक्सलियों के चंगुल से छुड़ाकर ही दम लेंगे। इसके बाद पाकुड़, दुमका और गोड्डा समेत पूरे संथाल परगना में एक बहुत बड़ा और ताबड़तोड़ नक्सल विरोधी अभियान छेड़ा गया। जंगलों की खाक छानी गई, लगातार छापेमारी हुई। इस कड़े एक्शन का नतीजा यह हुआ कि कई बड़े नक्सली सलाखों के पीछे पहुंचे और कई मुठभेड़ में ढेर हो गए। पुलिस का कहना है कि इसी कड़ी कार्रवाई और जवानों की शहादत का असर है कि आज संथाल परगना से नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा हो चुका है और लोग चैन की सांस ले रहे हैं।
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